राष्ट्रपति की शक्तियां घटाने पर पाक सरकार में मतभेद
कानून मंत्री बाबर अवान ने अस्वस्थ होने की वजह से शुक्रवार को नेशनल असेंबली के सत्र में भाग नहीं लिया। हालांकि इसके पीछे वास्तविक कारण रजा रब्बानी की प्रधानमंत्री के सलाहकार के रूप में नियुक्ति को माना जा रहा है।
रब्बानी संसद के उच्च सदन के पूर्व सदस्य रह चुके हैं और उन्होंने संविधान सुधार समिति का नेतृत्व किया था जिसने राष्ट्रपति की शक्तियां कम कर 18वें संविधान संशोधन विधेयक की सिफारिश की थी।
आनलाइन न्यूज एजेंसी के मुताबिक, "अवान इस विधेयक को पेश करना चाहते थे लेकिन रजा रब्बानी की नियुक्ति के बाद वह इस उपलब्धि को हासिल नहीं कर सके। इसके बाद ही उन्होंने संसद सत्र में भाग न लेने की इच्छा जाहिर की। "
इस विधेयक को पेश किए जाने से कुछ समय पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा, "मैं समिति और राजनीतिक दलों की प्रशंसा करता हूं जिन्होंने तानाशाह द्वारा संविधान को कुचलने के कृत्य को दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया।"
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1973 में संविधान के निर्माण के बाद यह पहली बार होगा जब प्रधानमंत्री को अभूतपूर्व शक्तियां प्रदान की जाएंगी। इसके जरिये वह देश के प्रधान कार्यकारी हो जाएंगे। वह हालांकि इन शक्तियों का इस्तेमाल राष्ट्रपति के नाम के जरिये ही कर सकेंगे।
इस संशोधन के जरिये प्रधानमंत्री कार्यालय को सेना प्रमुखों की नियुक्तियों का अधिकार भी हासिल हो जाएगा जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने 17वें संविधान संशोधन के द्वारा हासिल कर लिया था।
नए विधेयक को 18वां संशोधन नाम दिया गया है। इसकी सिफारिश संविधान सुधार समिति ने की है। समिति ने 1973 के संविधान को बहाल करने के लिए कड़ी मशक्कत की और इस पर नौ महीने कार्य किया।
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। 18वें संविधान संशोधन के तहत राष्ट्रपति भविष्य में संसद को भंग नहीं कर सकेगा। वह प्रधानमंत्री की सिफारिश पर ही ऐसा कर सकेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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