हैड्रॉन कोलाइडर: सफल प्रयोग के बाद शोध कार्य आगे बढ़ेगा
जेनेवा के निकट अरबों डॉलर लगाकर बनाई गई इस महामशीन-जो अपने आप में एक प्रयोगशाला है- में जमीन से 175 मीटर नीचे 27 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई गई। इसी पाइप लाइन में मंगलवार को दो विपरीत दिशाओं में अत्यंत तेज गति से प्रोटोन छोड़े गए।
वैज्ञानिकों के मुताबिक जब ये प्रोटोन आपस में टकराए तो एक विशेष प्रकार के कण की उत्पत्ति हुई। प्रयोगशाला में प्रोटोन युक्त किरणें अब तक संभव अधिकतम ऊर्जा से साढ़े तीन गुना अधिक ताकत से आपस में टकराई गई थी।
यह महाप्रयोग यूरोपीय परमाणु शोध संगठन (सीईआरएन) की प्रयोगशाला में संपन्न हुआ था। सीईआरएन के महानिदेशक रॉल्फ ह्यूर ने कहा, "भौतिकी कण के शोधकर्ताओं के लिए यह महान दिन था। बड़ी संख्या में लोग इस दिन का इंतजार कर रहे थे।"
एलएचसी कार्यक्रम के प्रवक्ता फेबिलो गियानोटी ने कहा, "आधुनिक भौतिकी विज्ञान से संबंधित कई रहस्यों का हम जल्दी पता लगाएंगे। मेरे विचार से हमारे सामने एक रोमांचक समय आने वाला है।"
सीईआरएन 18 से 24 महीने तक एलएचसी को संचालित करेगी ताकि ब्रह्मांड के और राज खुलकर सामने आएं। स्टैंडर्ड मॉडल कण का पता चलने के बाद वैज्ञानिक भौतिकी विज्ञान के एक नए अध्याय की शुरुआत करेंगे।
सीईआरएन के अनुसार स्टैंडर्ड मॉडल कण का पता चलने के बाद वैज्ञानिक 'हिग्स बॉसन' का पता लगाएंगे। 'हिग्स बॉसोन' भी भौतिकी कण ही है और यह स्टैंडर्ड मॉडल से निकलता है।
सीईआरएन के महानिदेशक ह्यूर ने कहा, "2000 से अधिक छात्र एलएचसी के प्रयोग से प्राप्त आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। "
उल्लेखनीय है कि एलएचसी ने पिछले साल 10 सितंबर को काम करना शुरू किया था लेकिन कुछ दिनों बाद गंभीर तकनीकी खामियों की वजह से इसे बंद कर दिया गया था। मंगलवार को इसका प्रयोग सफल होने से ब्रह्मांड की उत्पत्ति का राज खुलने की उम्मीद बढ़ गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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