हैदराबाद के दंगों पर कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप
हैदराबाद, 30 मार्च (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के लिए बड़ी दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है। तेलंगाना के कुछ कांग्रेस नेताओं ने खुलेआम अपनी ही पार्टी के दो अन्य क्षेत्रों के सहयोगियों पर हैदराबाद के सांप्रदायिक दंगों में शामिल होने का आरोप लगाया है।
निजामाबाद से कांग्रेस सांसद मधु याक्षी गौड़ का कहना है कि सांप्रदायिक दंगे आंध्र प्रदेश और रायलसीमा क्षेत्र के नेताओं का षडयंत्र हैं क्योंकि पृथक तेलंगाना राज्य की मांग का विरोध करने वाले नेताओं ने मुसलमानों को चेतावनी दी थी कि पृथक राज्य में सांप्रदायिक दंगे होंगे।
याक्षी ने हैदराबाद में 1990 में हुए सांप्रदायिक दंगों का हवाला देते हुए कहा, "यह षडयंत्र वैसा ही है जैसा कि चेन्ना रेड्डी की सरकार के दौरान उन्हें सत्ता से हटाने के लिए रचा गया था।" पूर्व मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी (वाईएसआर) के विरोधियों चाहे वे कांग्रेस के भीतर के हों या विपक्ष के, ने आरोप लगाया था कि चेन्ना रेड्डी को सत्ता से बाहर करने के लिए वाईएसआर ने दंगे भड़काने का काम किया था।
वरिष्ठ कांग्रेस विधायक शंकर राव ने भी आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री रोसैया का विरोध करने वालों का दंगों में हाथ है क्योंकि वे रोसैया और उनकी सरकार को बदनाम करना चाहते हैं।
आंध्र व रायलसीमा क्षेत्र के विधायकों ने इन नेताओं के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री रोसैया को भी अजीबोगरीब स्थिति का सामना करना पड़ा जब विपक्ष के नेता एन. चंद्रबाबू नायडू ने कांग्रेस के ही एक विधायक के बयान का हवाला देते हुए दंगों की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने एक बयान जारी कर लोगों से शांति व संयम बनाए रखने की अपील की। राज्य में शांतिपूर्ण स्थिति बहाल करने के लिए उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठने का आग्रह किया।
मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एमआईएम) के विधायक अहमद पाशा खदरी ने कहा कि उनकी पार्टी ने हिंसा भड़काने वाले लोगों और राजनीतिक दलों के नाम सरकार को दिए हैं और इसकी जांच की मांग की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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