भारत में मृत्यदंड समाप्त होने के करीब : एमनेस्टी

लंदन, 30 मार्च (आईएएनएस)। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मंगलवार को कहा है कि लगातार पांच वर्षो तक किसी को फांसी की सजा न देकर भारत मृत्युदंड पर रोक लगाने के स्वागतयोग्य मार्ग पर अग्रसर है। लेकिन पिछले वर्ष भारतीय अदालतों द्वारा 50 मामलों में सुनाई गई फांसी की सजा एक गंभीर बहस का संकेत कर रही है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अंतरिम महासचिव क्लाडियो कोरडोन ने भारत में फांसी न दिए जाने की इस स्थिति का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वह अपने मिश्रित रिकॉर्ड को सुधारे और मृत्युदंड को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़े।

कोरडोन ने कहा है, "भारत मृत्युदंड को समाप्त करने के रुख और इस गलतफहमी के बीच उलझा हुआ है कि मृत्युदंड अपराध और आतंकवाद के खिलाफ एक प्रभावी उपाय है। अब समय आ गया है जब भारतीय नेताओं को मृत्युदंड की बहस में मृत्युदंड की निर्थकता पर जोर देना चाहिए और मानव अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।"

भारत का रिकॉर्ड चीन, ईरान और सूडान के ठीक विपरीत है, जहां मृत्युदंड को लगातार राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

एमनेस्टी की ओर से कहा गया है, "मृत्युदंड पर पाबंदी लगाए जाने को लेकर वैश्विक सोच में आए तीव्र बदलाव के बावजूद कुछ देशों में मृत्युदंड का व्यापक और राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है।"

वर्ष 2009 में चीन में बाकी दुनिया की बनिस्बत अधिक लोगों को मृत्युदंड दिया गया।

चीन ने सही आंकड़े बताने से इंकार कर दिया है, लेकिन पूर्व के वर्षो से प्राप्त सबूत और वर्तमान सूत्र इस बात का संकेत करते हैं कि मृत्युदंड पाने वालों की संख्या हजारों में है।

एमनेस्टी ने भारत से आग्रह किया है कि वह फांसी पर लगातार रोक लगाए रखे और मृत्युदंड पर स्थायी रूप से प्रतिबंध लगाएं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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