कुंभ पर्व : शानदार रहा अंतिम शाही स्नान
घाटों पर जाने के लिए कतारबद्ध श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाने के लिए अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि गंगा में डुबकी लगाने से उनके इस जन्म और पिछले जन्म के पाप धुल जाएंगे और वे जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाएंगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई भृतहरि के लिए हर की पौड़ी बनवाई थी। वह गंगा के किनारे ध्यान लगाते थे। इसे ब्रह्म कुंड भी कहा जाता है। ऐसा विश्वास है कि यही वह स्थान है जहां से गंगा हिमालय को छोड़कर मैदानी इलाके में बहती है।
चैत्र पूर्णिमा स्नान के दौरान सूर्यप्रणाम करने और मृत लोगों को याद करते हुए गंगा पर सामूहिक रूप से फूल व चावल चढ़ाने की प्रथा है।
मंगलवार को अखाड़ा स्नान का अंतिम दिन था। छह वैष्णव अखाड़ों के साधुओं ने गंगा में स्नान किया। घाटों की ओर बढ़ते साधुओं के दर्शन के लिए अनेक श्रद्धालु हाथ जोड़कर खड़े थे।
इस स्नान में जूना, बैरागी और निरमोही सहित अन्य अखाड़ों के साधु शामिल हुए। सुबह 11 बजे शुरू हुआ अखाड़ा स्नान शाम सात बजे तक चलेगा।
हर की पौड़ी पर श्रद्धालुओं की कुछ अजीब हरकतें भी देखने को मिलीं। कुछ लोग चक्कर खाकर गिर पड़े और उन्हें पुलिस को अलग ले जाना पड़ा। वहीं एक आदमी हनुमान जी के वेश में उछलता-कूदता दिखा तो एक अन्य तिरंगे की वेश-भूषा में भ्रष्टाचार को सबसे बड़ी बुराई बता रहा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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