रुस विरोध बड़ा कारण

मॉस्को के मेट्रो में हुए चरमपंथी धमाकों के पीछे एक लंबा इतिहास है. वैसे तो कुछ समय से रुस में शांति थी लेकिन रुस के आसपास के इलाक़ों में विद्रोह के स्वर मुखर हो रहे थे.

दक्षिणी कॉकेशस के कई प्रांतों में रुस का विरोध बढ़ रहा था. बीबीसी संवाददाता सुशील झा ने जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में रुसी मामलों की विशेषज्ञ अनुराधा चिनॉय से इन्हीं मुद्दों पर बातचीत की.

मॉस्को में हुए इन धमाकों के पीछे किनका हाथ हो सकता है ?

पिछले कुछ समय से मॉस्को में शांति ज़रुर है लेकिन दक्षिणी कॉकेशस (चेचन्या, दागेस्तान, इंगुशेतिया इत्यादि) में अशांति है. लोग नाराज़ हैं. असल में रुस ने इन इलाक़ों पर दबाव डाला और वहां चुनाव कराए. चुनाव में रुस समर्थक ख़दीरौफ़ चुने गए. अब ख़दीरौफ़ वहां दमन कर रहे हैं. ख़दीरौफ़ लोकप्रिय नहीं हैं लेकिन चूंकि वह सेना से आए हैं तो अपनी दमनकारी नीतियों से शांति बनाए हुए थे. कुछ वर्षों से चेचन्या के विद्रोही बिखरे हुए थे लेकिन अब वो एकजुट हो रहे हैं.

क्या चेचन्या में ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्हें इन धमाकों से जोड़ा जाए ?

अनुराधा- ऐसा नहीं है. असल में चेचन्या में छिटपुट हिंसा हो रही है. कभी कोई मारा जाता है या किसी का अपहरण हो जाता है. गृहयुद्ध जैसी स्थिति तो नहीं है लेकिन एक विद्रोह का मूड है चेचन्या में. छोटी छोटी कई घटनाएं होती रही हैं. दबाव में शांति बनी थी. एक और बात है कि मॉस्को ने इन इलाक़ों में विकास का काम भी किया लेकिन यहां अभी भी ऐसे ग्रुप हैं जो ख़दीरौफ़ का अलग अलग कारणों से विरोध करते हैं.

क्या मॉस्को के हमलों से माना जाए कि एक बार फिर चेचन गुटों की ताकत बढ़ गई है ?

आतंकवाद तो एक तरीका है. दो लोग हों या बड़ा गुट हो, ऐसे हमले किए जा सकते हैं. मैं कह सकती हूं कि इस समय चेचन्या में कोई लोकप्रिय विद्रोह नहीं हो रहा है. कोई धरने प्रदर्शन नहीं हुए हैं. लेकिन चेचन्या में कई गुट बचे हैं जिनके अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी गुटों से संबंध हैं और कोई नहीं बता सकता कि किस गुट ने किसकी मदद से कहां धमाका कर दिया है.

चेचन्या विद्रोह और जार्जिया का क्या कोई संबंध है

देखिए चेचन्या से सटा हुआ जार्जिया है जो रुस से अलग हुआ है. जार्जिया को तोड़ा है रुस ने. खार्जिया और दक्षिण ओसेतिया जार्जिया से अलग हुए हैं. इस पूरे इलाक़े में जिसे कॉकेशस कहते हैं इनमें एक रुस विरोध का माहौल है. तो इनमें से कोई भी धमाके कर सकता है. जहां तक चेचन्या का सवाल है तो ये बिल्कुल घरेलू आंदोलन था लेकिन हो सकता है कि चेचन्या विद्रोहियों को जार्जिया से मदद मिली हो. ऐसा संभव है क्योंकि दोनों ही प्रांतों में कहीं न कहीं रुस विरोध की भावना देखने में आती है.

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