अदालतें सदन की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं : सर्वोच्च न्यायालय
प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाले पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पूर्व लोकसभा सदस्य रामदास आठवले की ओर से दायर कानूनी याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया। भारतीय रिपब्लिकन पार्टी के नेता आठवले ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मनोहर जोशी के उस निर्णय पर सवाल खड़ा किया था, जिसमें उन्होंने वर्ष 2004 में संसद के प्रथम सत्र को राष्ट्रपति के अभिभाषण के बगैर ही शुरू कर दिया था।
13वीं लोकसभा का 14वां सत्र दो दिसंबर 2003 को शुरू हुआ था और 23 दिसंबर को सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था। बाद में जोशी ने 20 जनवरी, 2004 को अधिसूचना जारी की थी कि 14वां सत्र 29 जनवरी से फिर शुरू होगा और नव वर्ष के पहले सत्र को राष्ट्रपति संबोधित नहीं करेंगे।
आठवले का तर्क था कि संविधान के अनुच्छेद 87(1) के अनुसार नव वर्ष के पहले सत्र के लिए राष्ट्रपति का अभिभाषण जरूरी होता है और पिछले वर्ष में अनिश्चित काल के लिए स्थगित हुआ कोई भी सत्र नव वर्ष में फिर से शुरू नहीं किया जा सकता।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications