तमिलनाडु सरकार ने नलिनी की रिहाई की याचिका खारिज की (लीड-1)
तमिलनाडु के महाधिवक्ता पी.एस.रामन ने जेल सलाहकार बोर्ड के निर्णय का जिक्र करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय में सरकार का निर्णय प्रस्तुत किया।
वेल्लोर के जिला कलेक्टर के नेतृत्व वाले इस बोर्ड ने नलिनी को रिहा न करने के आठ कारण गिनाए थे। इसमें गांधी की हत्या के लिए उसके द्वारा माफी मांगने से इंकार किया जाना भी शामिल है।
रामन ने अपना निर्णय न्यायमूर्ति एलिपा धर्म राव और न्यायमूर्ति के.के.शशिधरन की खंडपीठ को सौंपा।
यह मामला जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दर्ज कराया गया था। स्वामी ने सजा कम किए जाने के नलिनी के अधिकार को चुनौती दी थी। स्वामी के अनुसार नलिनी को पहले ही मृत्युदंड से राहत दिया जा चुका है।
द्रविण मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सांसद टी.के.एस.एलंगोवन ने आईएएनएस से कहा, "सरकार ने स्वतंत्र बोर्ड के निर्णय को स्वीकार कर लिया है।"
सत्ताधारी डीएमके की सहयोगी, कांग्रेस पार्टी ने नलिनी को जेल में बनाए रखने के सरकार के निर्णय का स्वागत किया है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता डी.सुदर्शनम ने आईएएनएस से कहा, "जो पक्ष तमिलनाडु सरकार का है, वहीं हमारा भी है।"
ज्ञात हो कि श्रीपेरंबुदूर में एक चुनावी सभा के दौरान राजीव गांधी की हत्या करने वाली नलिनी और अन्य अभियुक्तों की रिहाई के मामले का कांग्रेसी नेताओं ने विरोध किया था।
उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने कहा था कि नलिनी की याचिका पर राज्य सरकार केंद्र से विचार-विमर्श करेगी।
नलिनी को पहले मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। बाद में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद इसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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