भ्रष्ट राजनेता पर जांच नहीं बिठा सकता सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली। एक महत्वपूर्ण मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि राजनेता किसी भ्रष्टाचार में लिप्त है तो उसकी जांच के लिए आदेश देना सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट की सीमाओं को परिभाषित करता ये फैसला बताता है कि राजनीति में हस्तक्षेप करने के विषय में न्यायपालिका के अधिकार बेहद सीमित हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में दिया। चामलिंग के खिलाफ जांच के निर्देश देने से इंकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार में संलिप्त नेताओं के खिलाफ जांच के निर्देश कोर्ट नहीं दे सकती।
प्रधान न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि अगर अदालत मामला चलाने का निर्देश देती है तो यह आरोपी के खिलाफ 'गंभीर पूर्वाग्रह' का कारण बन सकता है। अदालत ने याचिका दायर करने वाले सिक्किम विधानसभा के विपक्ष के नेता कुंगामीना लेपचा से कहा कि अगर मुख्यमंत्री के खिलाफ उनकी कोई मांग है तो वे जांच एजेंसी से संपर्क करें।













Click it and Unblock the Notifications