फैशन सप्ताह में चमड़े के वैकल्पिक परिधान पेश
नई दिल्ली, 26 मार्च (आईएएनएस)। 'विल्स लाइफस्टाइल इंडिया फैशन वीक' (डब्ल्यूआईएफडब्ल्यू) के जरिए डिजाइनर्स अपने वस्त्र संग्रह को विलुप्तप्राय बाघों पर केंद्रित कर वन्यजीवों और जानवरों की सुरक्षा का संदेश दे रहे हैं और लोगों को चमड़े से बनी चीजों के इस्तेमाल से बचने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
डिजाइनर द्वय हेमंत-नंदिता ने 'पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनीमल्स (पेटा) इंडिया' के साथ सहयोग करते हुए अपने वस्त्र संग्रह में चमड़े के इस्तेमाल से बचने के वैकल्पिक तरीके प्रस्तुत किए हैं। उनका संग्रह जानवरों की त्वचा जैसे दिखने वाले डिजिटल प्रिंट्स से तैयार वस्त्रों पर केंद्रित है।
नंदिता ने आईएएनएस को बताया, "हमने ग्राफिक प्रिंट्स का बहुत अधिक इस्तेमाल किया है और यह जानवरों की त्वचा जैसे ही दिखते हैं। सामान्य रूप से लोग जानवरों की त्वचा के एहसास के लिए चमड़े की वस्तुएं या परिधान खरीदते हैं हमारे वस्त्रों और बैग्स से ऐसा ही एहसास मिलेगा।"
उन्होंने कहा, "मुझे व्यक्तिगत तौर पर चमड़े की गंध पसंद नहीं है और मुझे आश्चर्य होता है कि लोग शुद्ध चमड़े की चीजें क्यों खरीदना चाहते हैं और खासकर तब जबकि इसका मतलब यह हो कि जानवरों की हत्या से अगले कुछ सालों में वे विलुप्त हो जाएंगे। यही समय है जब हमें पर्यावरण में गड़बड़ियां रोकने के लिए इसके खिलाफ खड़े हो जाना चाहिए।"
डिजाइनर नीता भार्गव का संग्रह 'कॉल फॉर द वाइल्ड' शीर्षक के साथ 'सेव द टाइगर' परियोजना पर केंद्रित है।
भार्गव कहती हैं, "एक डिजाइनर होने के नाते मैं महसूस करती हूं कि मुझे मेरी ओर से इस दिशा में प्रयास करना चाहिए। इसलिए मैंने बाघों की पेंटिंग वाले परिधान पेश किए, इससे लोग यह समझ सकेंगे कि फैशन में और भी कुछ किया जा सकता है। हमें जो परियोजनाएं अच्छी लगती हैं उनमें हम अपने ढंग से अपना योगदान दे सकते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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