इरावडी डॉल्फिनों को बचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू
'भारत में इरावडी डॉल्फिनों पर पहली अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला' शीर्षक से आयोजित सम्मेलन में जापान, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे एशियाई देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया है।
उड़ीसा के वन एवं पर्यावरण विभाग के मुख्य सचिव यू. एन. बेहरा का कहना है, "मानव विकास के लिए जल बेहद आवश्यक है और अब इसे पृथ्वी का सबसे बहुमूल्य प्राकृतिक स्रोत माना जाने लगा है।"
उन्होंने कहा, "पृथ्वी पर जीवन के विकास में जलीय भूमि का बहुत महत्व है। एक ठोस संरक्षण योजना के विकास के लिए जल के अंदर के डॉल्फिनों के व्यवहार को जानना बहुत जरूरी है।" उन्होंने कहा कि कार्यशाला में भाग ले रहे विशेषज्ञ और वैज्ञानिक इस महत्वपूर्ण विषय पर अपनी बात रखेंगे।
चिल्का विकास प्राधिकरण (सीडीए) ने जापान के टोक्यो विश्वविद्यालय के सहयोग से इस सम्मेलन का आयोजन किया है।
उड़ीसा स्थित चिल्का झील 150 से अधिक विलुप्तप्राय इरावडी डॉल्फिनों का घर है। दुनियाभर में डॉल्फिनों की आबादी करीब 900 आंकी गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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