गूगल का बाहर जाना एक साजिश : चीनी दैनिक
एक लेख में समाचार पत्र 'चाइना डेली' ने जोर दिया कि चीन की मुख्य भूमि से गूगल का हटना एक साजिश है।
स्टेट काउंसिल के अधीन डेवलपमेंट रिसर्च सेंटर के शोधकर्ता डिंग यिफान द्वारा लिखित लेख में कहा गया है कि गूगल का हटना पूरी तरह व्यावसायिक कदम नहीं है। यह घटना चीन के साथ अमेरिका के राजनीतिक खेल का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जर्मनी, फ्रांस, भारत और अन्य देशों में भी गूगल की सेवा जांच के दायरे में है।
जनवरी में गूगल ने कथित साइबर हमलों के कारण चीन छोड़ने की धमकी दी थी। उसने यह भी कहा था किक वह अपने चीनी भाषा के खोज परिणामों को फिल्टर नहीं करेगी।
गूगल अपने चीनी भाषा के सर्च इंजन वेबसाइट को हांगकांग ले गया और सोमवार को चीनी भाषा के खोज परिणामों को रोक दिया।
लेख में कहा गया है कि गूगल की इस घोषणा के कुछ ही दिन पहले अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने ओबामा प्रशासन की विदेश नीति में सहायता के लिए गूगल की जमकर प्रशंसा की थी।
क्लिंटन ने जार्जिया और ईरान में जनता की राजनीतिक विचारधारा को प्रभावित करने के लिए अमेरिकी राजनीतिक कदमों और मूल्यों को फैलाने में गूगल की सकारात्मक भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि व्हाइट हाउस का मानना है कि गूगल अकेले चीन में एक बड़ी भूमिका नहीं निभा सकता जैसा कि उसने जार्जिया और ईरान में किया।
इसके कुछ दिनों के बाद ही गूगल ने दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट बाजार से अपनी सेवाएं बंद कर दी और कहा कि चीनी सरकार के कड़े इंटरनेट सेंसरशिप प्रावधनों को वह सहन नहीं कर सकती।
लेख में आरोप लगाया गया कि गूगल के ओबामा प्रशासन के साथ नजदीकी संबंध हैं और ओबामा के राष्ट्रपति पद के चुनाव प्रचार में कंपनी चौथा सबसे बड़ा प्रायोजक थी। इस नजदीकी संबंध के कारण गूगल ओबामा प्रशासन की विदेश नीति को लागू करने में मददगार है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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