भारतीय मूल के अर्थशास्त्री का मसीहा के रूप में स्वागत
पंथ 'शेयर इंटरनेशनल' को मानने वाले लोगों ने दुनियाभर से पटेल पर इससे संबंधित ई-मेल संदेशों की बारिश कर दी है। हताश पटेल कहते हैं, "मैं मसीहा नहीं हूं.. मैं केवल एक आर्थिक विशेषज्ञ हूं।"
स्कॉट्समैन क्रीम ने 50वें दशक में इस पंथ की स्थापना की थी। पंथ का विश्वास है कि 1.8 लाख वर्ष पुराने 'मैत्रेय' या मसीहा में ईसाईयत, बौद्ध, हिंदू, यहूदी और इस्लाम धर्म के तत्व हैं और वह पिछले 2,000 वर्षो से हिमालय में रहते रहे हैं।
इस सब की शुरुआत उस समय हुई जब 37 वर्षीय पटेल ने जनवरी में अमेरिका में एक टेलीविजन साक्षात्कार दिया। इस कार्यक्रम में उनकी वैश्विक वित्तीय संकट पर आधारित किताब 'द वेल्यू ऑफ नथिंग' पर चर्चा हुई थी।
समाचार पत्र 'द सन' के गुरुवार को प्रकाशित अंक के मुताबिक इसके बाद 'शेयर इंटरनेशनल' के संस्थापक बेंजामिन क्रीम ने कहा था कि अंतत: मसीया या 'मैत्रेय' का आगमन हो गया है।
पंथ के मुताबिक पटेल में 'मैत्रेय' के कई गुण हैं।
पटेल ने उनके तथाकथित मसीहा होने की बात को नकार दिया है। उनका कहना है कि वह केवल एक साधारण पुरुष हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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