अब शिक्षा क्षेत्र में 'काम नहीं तो वेतन नहीं'
नई दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने शिक्षा के क्षेत्र में काम न करने पर वेतन न देने की नीति अपनाने की वकालत की है। इसके अलावा वह सार्वजनिक-निजी साझेदारी को शिक्षा क्षेत्र के विकास के लिए बेहतर मानते हैं। सिब्बल ने सरकारी संस्थानों को इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के लिए आउटसोर्सिंग को बढ़िया तराका बताया है।
योजना आयोग की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में सिब्बल ने कहा, "इससे सरकार के क्षमता विकास में मदद मिलेगी और इंफ्रास्ट्रक्चर के काम को बहुत जल्द पूरा किया जा सकेगा। दूसरा लाभ 'काम नहीं तो वेतन नहीं' के सिद्धांत को लागू करने से होगा। इससे शिक्षा के स्तर को हमेशा ऊंचा बनाया रखा जा सकेगा। तीसरा निजी क्षेत्र की पहल से उन्नत और कम लागत वाली इमारत की डिजाइनें सामने लाई जा सकेगी।"
सिब्बल ने कहा कि स्कूलों और कालेजों की इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट के काम को निजी क्षेत्र को दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्यों में पुराने स्कूलों को सार्वजनिक-निजी साझेदारी के तहत तरोताजा करने पर भी विचार किया जा रहा है।













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