कानू सान्याल के निधन पर भाकपा, माकपा ने शोक जताया
भाकपा के उप महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "नक्सलबाड़ी आंदोलन के शुरुआती दिनों में वह एक लोकप्रिय नेता हुआ करते थे। सशस्त्र संघर्ष की उनकी विचारधारा से हालांकि हम सहमत नहीं हैं लेकिन उन्होंने वामपंथी आंदोलन में बड़ा योगदान किया।"
माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि सान्याल की मौत बहुत दुर्भाग्यपूण है। नक्सलियों के वर्तमान रुख के वह भी आलोचक थे।
सान्याल को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी में मंगलवार को अपने घर में मृत अवस्था में पाया गया। वह 78 वर्ष के थे।
पुलिस के मुताबिक दार्जिलिंग जिले में अपनी झोपड़ी में सान्याल ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
नक्सलबाड़ी गांव में 1967 में जिस कृषक आंदोलन से नक्सलवाद का उदय हुआ उस आंदोलन का नेतृत्व करने वालों में सान्याल अग्रणी थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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