अमेरिका-पाक रणनीतिक वार्ता भारत वार्ता का विस्तार नहीं : हॉलब्रुक
वाशिंगटन, 20 मार्च (आईएएनएस)। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक के अनुसार अगले हफ्ते होने वाली पहली अमेरिका-पाकिस्तान रणनीतिक वार्ता भारत या अन्य किसी देश के साथ की रणनीतिक वार्ता का विस्तार नहीं होगी।
हॉलब्रुक ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, "हमारे भारत और चीन सहित अन्य देशों के साथ महत्वपूर्ण रणनीतिक संवाद है। इसके साथ ही पाकिस्तान के साथ भी वार्ता को हमें महत्वपूर्ण बनाना है।"
यह पूछे जाने पर कि क्या यह वार्ता भारत के साथ रणनीतिक वार्ता से भिन्न होगी, हॉलब्रुक ने कहा, "यह एक द्विपक्षीय वार्ता है। मैं बहुत स्पष्ट कर दूं कि पाकिस्तान के साथ रणनीतिक वार्ता क्षेत्र के किसी अन्य देश से वार्ता का विस्तार नहीं है।"
बहरहाल उन्होंने भारत और पाकिस्तान की रणनीतिक वार्ताओं के बीच एक अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि सेना को सक्रिय रूप से शामिल किए बगैर पाकिस्तान के साथ कोई रणनीतिक वार्ता नहीं हो सकती।
हॉलब्रुक ने कहा कि अमेरिका-पाकिस्तान रणनीतिक वार्ता में इसलिए पाकिस्तानी सेना के अध्यक्ष जनरल अशफाक परवेज कयानी और इंटर सर्विसिज इंटेलीजेंस के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल शुजा पाशा को शामिल किया है।
यह कहे जाने पर कि अमेरिका राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के राजनीतिक नेतृत्व की अपेक्षा सेना से वार्ता में अधिक सहज महसूस करता है, हॉलब्रुक ने कहा, "बिना सेना को शामिल किए आप कैसे रणनीतिक वार्ता कर सकते हैं।"
हॉलब्रुक ने कहा, "यदि हम अपने देश में रणनीतिक वार्ता करते तो उसमें ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टॉफ के प्रमुख को शामिल करते। इसलिए जनरल कयानी के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने से हम खुश हैं।"
रणनीतिक वार्ता की सहअध्यक्षता अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी करेंगे। इसके अलावा पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल में रक्षा मंत्री अहमद मुख्तार और सेना प्रमुख शामिल होंगे।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख एडमिरल माइक मुलेन भी शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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