अमेरिकी आश्वासन के बाद हेडली से पूछताछ की तैयारी (लीड-1)

केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने शनिवार को कहा कि अमेरिका के न्याय विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने उनको आश्वस्त किया है कि भारत को मुंबई हमलों में भूमिका के बारे में संदिग्ध आतंकवादी डेविड हेडली से पूछताछ की शीघ्र अनुमति मिलेगी।

अमेरिका के अटार्नी जनरल और न्याय विभाग के प्रमुख एरिक होल्डर ने शुक्रवार को चिदंबरम को फोन कर यह आश्वासन दिया। हेडली पर मुकदमा शुरू होने से पहले ही ऐसा संभव हो सकता है।

हेडली ने स्वयं को भारत को प्रत्यर्पित किए जाने से बचाने के लिए शिकागो के न्यायालय में आतंकवाद के सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया है।

चिदंबरम ने कहा कि इस वार्ता से वह बहुत प्रसन्न हैं और हेडली के दोष स्वीकारने के संबंध में कई पहलू स्पष्ट हो गए।

अमेरिकी कानून के अनुसार अब हेडली पर मुकदमा चलाया जाएगा लेकिन उसे किसी अन्य देश को प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा और मौत की सजा नहीं दी जाएगी।

चिदंबरम ने एक बयान में कहा, "मेरे विचार से भारत हेडली से पूछताछ करने में सक्षम होगा। यह पूछताछ मुकदमे से पहले या उसके दौरान संभव है। हमें उम्मीद है कि जांच के दौरान हेडली सहयोग करेगा और सत्य बताएगा।"

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को शनिवार को हेडली और सहआरोपी तहव्वुर हुसैन राणा के खिलाफ जांच के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

उन्होंने कहा कि दोष स्वीकार करने की याचिका का भारत के लिए एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें कुछ पाकिस्तानी लोगों की ओर संकेत किया गया है।

उन्होंने कहा कि हेडली ने स्वीकार किया कि कुछ पाकिस्तानी लोगों ने मुंबई हमले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे पाकिस्तान लगातार इंकार करता रहा है। उसने लश्कर-ए-तैयबा द्वारा पाकिस्तान में संचालित कुछ प्रशिक्षण शिविरों और बैठकों में शामिल होना स्वीकार किया।

गृह मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान को दोष स्वीकार करने की याचिका के आधार पर मुंबई हमले के आरोपियों पर कार्रवाई करनी चाहिए और उनको सजा देनी चाहिए। इससे कम भारत और दुनिया को स्वीकार नहीं होगा।

इस बीच नई दिल्ली की यात्रा पर आए एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि मुंबई हमले के सिलसिले में पाकिस्तानी मूल के संदिग्ध आतंकवादी हेडली का प्रत्यर्पण संभव नहीं है लेकिन भारतीय अधिकारी उससे पूछताछ जरूर कर सकते हैं।

अमेरिका के दक्षिण एशिया और मध्य अफ्रीका मामलों के सहायक विदेश मंत्री रॉबर्ट ओ. ब्लेक ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, "हेडली मामले में याचिका संबंधी समझौते के अनुसार किसी भी मामले में उसे भारत, पाकिस्तान और डेनमार्क को प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता, जिसे उसने अदालत में स्वीकार कर लिया है।"

ब्लेक से पूछा गया कि क्या हेडली से पूछताछ के लिए भारतीय अधिकारियों को इजाजत दी जाएगी तो उन्होंने कहा, "मेरा उत्तर हां होगा।"

हेडली का ताल्लुक पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' से है जो मुंबई हमले के लिए जिम्मेदार है। मुंबई हमले में लगभग 167 लोग मारे गए थे।

ब्लेक ने कहा कि मुंबई हमले के अलावा भारत में अन्य कोई आरोप हेडली पर लगता है तो उसे भारत को प्रत्यर्पित करना संभव है। उन्होंने इस अटकल को खारिज कर दिया कि हेडली मसले पर अमेरिका भारत का सहयोग नहीं कर रहा है।

हेडली ने गुरुवार को शिकागो की एक अदालत में मुंबई हमले की साजिश में शामिल होने का आरोप स्वीकार कर लिया था। उसने आतंकवाद से जुड़े सभी 12 आरोपों को कबूल किया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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