अमेरिका ने हेडली से शीघ्र पूछताछ की अनुमति का आश्वासन दिया
अमेरिका के अटार्नी जनरल और न्याय विभाग के प्रमुख एरिक होल्डर ने शुक्रवार को चिदंबरम को फोन कर यह आश्वासन दिया। हेडली पर मुकदमा शुरू होने से पहले ही ऐसा संभव हो सकता है।
हेडली ने स्वयं को भारत को प्रत्यर्पित किए जाने से बचाने के लिए शिकागो के न्यायालय में आतंकवाद के सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया है।
चिदंबरम ने कहा कि इस वार्ता से वह बहुत प्रसन्न हैं और हेडली के दोष स्वीकारने के संबंध में कई पहलू स्पष्ट हो गए।
अमेरिकी कानून के अनुसार अब हेडली पर मुकदमा चलाया जाएगा लेकिन उसे किसी अन्य देश को प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा और मौत की सजा नहीं दी जाएगी।
चिदंबरम ने एक बयान में कहा, "मेरे विचार से भारत हेडली से पूछताछ करने में सक्षम होगा। यह पूछताछ मुकदमे से पहले या उसके दौरान संभव है। मेरे विचार से जांच के दौरान हेडली सहयोग करेगा और सत्य बताएगा।"
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को शनिवार को हेडली और सहआरोपी तहव्वुर हुसैन राणा के खिलाफ जांच के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने कहा कि दोष स्वीकार करने की याचिका का भारत के लिए एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें कुछ पाकिस्तानी लोगों की ओर संकेत किया गया है।
उन्होंने कहा कि हेडली ने स्वीकार किया कि कुछ पाकिस्तानी लोगों ने मुंबई हमले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे पाकिस्तान लगातार इंकार करता रहा है। उसने लश्कर-ए-तैयबा द्वारा पाकिस्तान में संचालित कुछ प्रशिक्षण शिविरों और बैठकों में शामिल होना स्वीकार किया।
गृह मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान को दोष स्वीकार करने की याचिका के आधार पर मुंबई हमले के आरोपियों पर कार्रवाई करनी चाहिए और उनको सजा देनी चाहिए। इससे कम भारत और दुनिया को स्वीकार नहीं होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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