फ़ोनसेका माफ़ी मामले में दख़ल नहीं

साथ ही राष्ट्रपति ने कहा है कि श्रीलंका की जातीय समस्या को सुलझाने के लिए संघीय ढाँचा नहीं अपनाया जाएगा. कुछ दिन पहले ही तमिलों की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी ने संघीय ढाँचे का समर्थन किया था और आज़ाद तमिल राष्ट्र की अपनी पुरानी माँग छोड़ दी थी.
स्ट्रेट्स टाइम्स से बातचीत में राष्ट्रपति राजपक्षे ने सरथ फ़ोनसेका को 'मूर्ख" करार दिया जिन्होंने हज़ारों सैनिकों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाया है. राष्ट्रपति ने कहा कि क़ानून सब पर लागू होता है और सेवानिवृत्त जनरल के ख़िलाफ़ सुनवाई में दख़ल नहीं दिया जाना चाहिए. जब उनसे एलटीटीई के बारे में पूछा गया तो राजपक्षे ने कहा कि ये आंदोलन ख़त्म नहीं हुआ है और प्रशिक्षित आत्मघाती हमलावर अब भी मौजूद हैं.
लेकिन साथ ही उनका कहना था कि ख़तरा सिर्फ़ एलटीटीई से ही नहीं बल्कि 'जेवीपी और फ़ोनसेका पहलू" पर भी गौर करना होगा. ये स्पष्ट नहीं हुआ कि वे असल में कहना क्या चाहते हैं. जेवीपी ने जनरल फ़ोनसेका का राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन किया था. 20 साल पहले ये एक विद्रोही गुट था.
'संघीय ढाँचा नहीं'
राजपक्षे ने इस बात को नकार दिया कि तमिल-बहुल इलाक़ों को ज़्यादा स्वायत्ता देने के लिए संघीय प्रणाली अपनाई जाएगी. उन्होंने कहा, "संघीय प्रणाली का मतलब होगा अलग होना. तमिल लोगों को स्कूलों और घरों की ज़रूरत है न कि संवैधानिक बदलावों की."
श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव हार चुके सरथ फ़ोनसेका के ख़िलाफ़ कोर्ट मार्शल चल रहा है. उन परपर सरकार का तख़्तापलट करने के लिए सेना के नियमों का उल्लंघन कर अपने कार्यकाल के दौरान राजनीतिक नेताओं से चर्चा करने का आरोप लगाया गया है. जनरल फ़ोनसेका इन सभी आरोपों का खंडन कर चुके हैं.
ब्रिटेन के चैनल फोर न्यूज़ ने कहा है कि जनरल फ़ोनसेका हिरासत के दौरान एक चिट्ठी बाह भेजने में सफल हुए हैं. इसमें उन्होंने अपील की है कि श्रीलंकाई लोग उन्हें तानाशाही और भ्रष्टाचार के चंगुल से बचाने में मदद करें. अगले महीने होने वाले आम चुनाव के लिए चुनाव अभियान चल रहा है. हिरासत में होने के बावजूद जनरल फ़ोनसेका चुनाव में खड़े हो रहे हैं. राष्ट्रपति राजपक्षे ने कहा है कि वे जीत के प्रति आश्वस्त हैं.












Click it and Unblock the Notifications