दलाई लामा ने भारत को सराहा

भोपाल। 'भारत अकेला ऐसा देश है जो दुनिया को एक परिवार मानता है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता मूल्यवान है क्योंकि सृजनशीलता विकसित करने के लिए यह आवश्यक है। भारत में व्यक्तिगत स्वतंत्रता है और इसीलिए यहां सृजनशीलता व लोकतंत्र सफलतापूर्वक काम कर रहा है।'

दलाई लामा ने यह विचार बुधवार को मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग द्वारा आयोजित 'मानव अधिकार एक वैश्विक दायित्व' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि 'भौतिक समृद्घि और सुविधाओं वाले देशों की युवा पीढी भटकी हुई है, क्योंकि वहां के मानव में आंतरिक जीवन की गुणवत्ता नहीं है। इसलिए आर्थिक व भौतिक समृद्घि की बजाय मानवीय गुणों के विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए। विश्वबंधुत्व की भावना, करुणा, प्रेम और भ्रातृत्व ही मानवाधिकारों की कुंजी है। मानवीय गुणों से अधिक सभ्य मानव विकसित होगा।'

आर्थिक समृद्घि और भौतिक समृद्घि की होड़ पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि यह दोनों समृद्घि या जीवन में सुख व शांति नहीं ला सकती और ज्ञानवान भी नहीं बनाती। अगर मानव को यह हासिल करना है तो उसे आध्यात्मिक और मानव मूल्यों को आत्मसात करना होगा। यही कारण है कि जिन देशों में भौतिक समृद्घि व सुविधाएं हैं, वहां मानव के आंतरिक जीवन में गुणवत्ता नहीं है। इतना ही नहीं उनकी युवा पीढ़ी भटक गई है।

इस मौके पर दलाई लामा ने प्रदेश में बौद्ध विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे बौद्घ धर्म के विज्ञान, अवधारणा और दर्शन के प्रसार में सहायता मिलेगी। उन्होंने महिलाओं के सशक्तीकरण और सक्रिय बनाए जाने पर जोर दिया। इस संगोष्ठी में राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी विचार व्यक्त किए।

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