डॉल्फिनें मनुष्य के साथ तैरना पसंद नहीं करती : अध्ययन

वेबसाइट 'इन डॉट कॉम' के मुताबिक ब्रिटिश विशेषज्ञों ने अपने अध्ययन में पाया है कि डॉल्फिनें उनके साथ तैराकी या गोताखोरी की ख्वाहिश रखने वाले पर्यटकों की मौजूदगी से प्रभावित होती हैं।

जंजीबार तट पर किए गए अध्ययन से पता चला है कि पानी में नौकाएं होने की वजह से इन स्तनियों को अविश्वसनीय तनाव से गुजरना पड़ता है।

'युनीवर्सिटी ऑफ न्यूकासल' के प्रमुख शोधकर्ता पर ब्रेग्रेन कहते हैं, "जंजीबार में वर्तमान में जो स्थिति है वह हमेशा नहीं रहेगी। स्थानीय समुदाय पर्यटन और इस प्रकार से डॉल्फिनों पर निर्भर है लेकिन यदि पर्यटकों की सक्रियताओं को नियंत्रित नहीं किया गया तो डॉल्फिनें यहां से चली जाएंगी।"

उन्होंने कहा, "हमारे अध्ययन में पाया गया है कि पर्यटक नौकाओं की मौजूदगी में डॉल्फिनें अस्थायी रहती हैं और भोजन करने, सामाजिकता या आराम करने में कम समय व्यतीत करती हैं। इसका डॉल्फिनों की पूरी आबादी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और लंबे समय में यह खतरनाक हो सकता है।"

वह कहते हैं कि परेशानी यह है कि यहां थोड़ा भी परिवर्तन करने पर पर्यटन पर इसका सीधे तौर पर असर होगा। उन्होंने कहा कि हमारा संदेश यह है कि पर्यटक डॉल्फिनों से दूरी बनाए रखें और उन्हें प्राथमिकता दें।

जंजीबार के दक्षिणी तट पर करीब 150 बॉटलनोज डॉल्फिन हैं। वर्ष 1992 से यहां पर्यटकों को डॉल्फिन देखने की इजाजत दी गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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