ईरान-पाक समझौता,भारत शामिल नहीं

ईरान-पाक समझौता,भारत शामिल नहीं

अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान और ईरान ने गैस पाइपलाइन के निर्माण को लेकर ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.भारत इस समझौते का हिस्सा नहीं है.

शुरुआती योजना के मुताबिक ये पाइपलाइन भारत तक जानी थी लेकिन भारत पिछले साल वार्ता से अलग होग गया था.

पाकिस्तान और ईरान के बीच तुर्की में ये समझौता हुआ है. 7.6 अरब डॉलर की ये परियोजना पाकिस्तान की ऊर्जा ज़रूरतें पूरी करने के लिए बेहद अहम मानी जा रही है.

भारत ईरान-पाकिस्तान के साथ मिलकर गैस पाइपलाइन योजना से जुड़ा रहा है. इस गैस पाइपलाइन को शुरू में 2.2 अरब क्यूबिक फ़ीट गैस भारत और पाकिस्तान को पहुँचाना था (दोनों देशों का आधी-आधी गैस).

शुरुआती योजना के अनुसार भारत-ईरान पाइप लाइन का लगभग एक हज़ार किलोमीटर का हिस्सा पाकिस्तान के होकर आना था और इसके लिए भारत को उसे ट्रांज़िट शुल्क देना पड़ता.

कई मतभेदों कारण भारत बाद में बातचीत से अलग हो गया था.

पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री नावेद उमर ने कहा है कि ये समझौता देश की ऊर्जा ज़रूरतें पूरा करने की दिशा की ओर मील का पत्थर साबित होगा.

पाइपलाइन ईरान के दक्षिण फ़ार्स गैस फ़ील्ड को पाकिस्तान के बलूचिस्तान और सिंध प्रांतों से जोड़ेगी. अधिकारियों का कहना है कि परियोजना में देरी पैसों की कमी के कारण हुई.

भारत नहीं हुआ शामिल

समझौते के तहत, ईरान प्रति दिन 750 क्यूबिक मिटर फ़ीट गैस पाकिस्तान को देगा. ये लाइन 2015 से चालू हो जाएगी.

पाइपलाइन का जो हिस्सा जिस देश में आएगा, उसी देश पर पाइपलाइन बनाने का ज़िम्मा होगा.

शांति पाइपलाइन नाम से मशहूर इस परियोजना के बारे में 90 के दशक में बात उठी थी. संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तान के साथ अविश्वास के माहौल के कारण भारत इस योजना का हिस्सा बनने को लेकर आशंकित रहा है.

इस गैस पाइपलाइन के बजाय भारत ने अपने परमाणु रिएक्टरों में निवेश किया है ताकि ऊर्जा ज़रूरतें पूरी की जा सकें. भारत ने 2008 में अमरीका के साथ परमाणु समझौता भी किया है.

पाकिस्तान कहता आया है कि वो वो भी अमरीका के साथ ऐसा ही समझौता करना चाहता है लेकिन अभी तक अमरीका ने कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं दिखाई है.

मंगलवार को ईरान और पाकिस्तान के बीच जो समझौता हुआ है उसके तहत अगर बाद में पाइपलाइन भारत तक ले जाई जाती है तो पाकिस्तान ट्राज़िट फ़ीस ले सकता है.

संवाददाताओं का कहना है कि अमरीका इस समझौते का स्वागत नहीं करेगा क्योंकि उसका आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है.

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