इसराइल को अमरीका का भरोसा

Hillary Clinton
अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स और विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन दोनों ने ही इसराइल और अमरीका के रिश्तों में खटास आने के दावों को ग़लत बताया है.

मंगलवार को अमरीका में इसराइल के दूत माइकल ओरेन के बयान को बाद अब अमरीकी अधिकारी बचाव में सामने आए हैं. ओरेन ने कहा था कि अमरीका और इसराइल के रिश्ते पिछले 35 साल में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. इस पर हिलरी क्लिंटन ने कहा है कि किसी भी दो देशों में असहमति होना स्वाभाविक है.

ये बयान अमरीका और इसराइल के बीच उठ रहे विवादों के बीच आया है. इसराइल ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि वो पूर्वी यरूशलम में यहूदियों के लिए सैंकड़ों रिहाइशी घर बनाएगा जिसे लेकर क़रीब एक हफ्ते से इसराइल और अमरीका के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है. अमरीका की विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन ने इसराइल की सुरक्षा के बारे में अमरीका की प्रतिबद्धता का भरोसा दिलाया है.

हिलेरी क्लिंटन ने कहा,“अमरीकी और इसराइली लोगों के बीच अटूट संबंध हैं. अमरीका अपने कई अंतरराष्ट्रीय सहयोगी देशों से कुछ मसलों पर असहमत है और ऐसा ही इसराइल के साथ है." इस बयान के साथ ही क्लिंटन ने ये भी साफ़ किया कि मध्य-पूर्व में शांति प्रक्रिया के लिए अमरीका इसराइल से कुछ ठोस क़दम उठाने की अपेक्षा करता है.

तनाव

वहीं पूर्वी यरुशलम और पश्चिमी तट में इसराइली पुलिस और फ़लस्तीनियों के बीच कई हिंसक झड़पें हुई हैं. फ़लस्तीनियों का आरोप है कि उन्हें उनके धार्मिक स्थलों तक जाने से रोका जा रहा है. इसराइली पुलिस के मुताबिक ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि तनाव को बढ़ने से रोका जा सके.

मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्थल के पास एक यहूदी धार्मिक स्थल के दोबारा खोले जाने से तनाव की स्थिति बन गई है. फ़लस्तीनियों के मुताबिक ये झड़पें दरअसल भविष्य में पूर्वी यरूशलम पर अधिकार के बारे में ही हैं.

इसराइल की निंदा

संयुक्त राष्ट्र सचिव बान की मून ने पूर्वी यरुशलम में इसराइली और फल्स्तीनी लोगों से शांति की अपील की है. साथ ही मून ने पूर्वी यरूशलम में रिहाइशी घर बनाने की इसराइल की योजना की निंदा की है. मून ने कहा कि, “इस तरह से रिहाइशी घर बनाना अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ है. यरूशलम में तीन धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं. उस इलाके का अंतिम दर्जा बातचीत के ज़रिए ही तय होगा."

उल्लेखनीय है कि फ़लस्तीनी पूर्वी यरुशलम को अपनी राजधानी बनाना चाहते हैं. इसराइल ने 1967 की लड़ाई के दौरान पूर्वी यरुशलम पर कब्ज़ा कर लिया था लेकिन अभी तक किसी देश ने इसे इसराइल के हिस्से के तौर पर मान्यता नहीं दी है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय पूर्वी यरुशलम को कब्ज़े वाला इलाक़ा मानता है.

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