मायावती का भाषण सुन लिया और चार पैसे भी कमा लिए
मध्य प्रदेश के दमोह जिले से आए छोटेलाल वैसे तो बसपा की रैली को कामयाब बनाने और मुख्यमंत्री मायावती का भाषण सुनने आए थे, लेकिन अपने साथ वह बेचने के लिए बसपा के नीले रंग वाला कलाई धागा, स्टीकर, नीली पट्टी, अंबेडकर का चित्र छपी कलम, ब्रैसलेट, आंबेडकर की मूर्ति लगी चाभी का गुच्छा और आंबेडकर व मायावती के फोटो छपे कार्ड भी लाए थे।
भाषण शुरू होने से चार घंटे पहले सुबह आठ बजे से वह रैली स्थल से कुछ दूरी पर खोमचा सजाकर बैठ गए और करीब 12 बजे तक उनका सारा सामान बिक गया।
छोटेलाल ने आईएएनएस से कहा, "बाबा साहब और बहन जी (मायावती) बसपा कार्यकर्ताओं के आदर्श हैं। लोग उनकी तस्वीर छपे पेन और ब्रैसलेट व मूर्तियां लगे चाबी के गुच्छे हाथोंहाथ खरीदते हैं। मैंने करीब एक हजार रुपये मूल्य के इन सामानों की बिक्री की।"
बहराइच से रैली में भाग लेने आए सुखजतन कुरील कल देर रात ही लखनऊ पहुंच गए थे। अपने साथ वह करीब 20 किलोग्राम नारियल की पट्टी लेकर आए थे।
कुरील ने कहा, "मैंने सुबह ही रैली स्थल से कुछ दूरी पर अपना खोमचा सजा लिया था और करीब तीन घंटे में सारी पट्टी बेचकर मैंने करीब एक हजार रुपये का धंधा कर लिया। बाद बहन जी का भाषण सुना।"
लखनऊ के मोहनलालगंज निवासी रामआधार भी रैली में हिस्सा लेने आए थे, लेकिन रैली स्थल से करीब एक किलोमीटर पहले सड़क के किनारे वह घर से लाए मीठे खुरमे की दुकान सजाकर बेचने लगे।
वह कहते हैं कि अगर इस तरह के मौकों पर अगर चार पैसों की कमाई हो जाए तो कोई हर्ज नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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