कम्प्यूटर, मोबाइल के बावजूद बढ़ी कलम की मांग
नई दिल्ली, 15 मार्च (आईएएनएस)। लिखने के लिए कलम का इस्तेमाल अब भी बंद नहीं हुआ है। कम्प्यूटर, मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग और ब्रांडेड फाउंटेन और बॉलप्वाइंट कलमों के दाम बढ़ने के बावजूद कलमों की बिक्री में वृद्धि हुई है।
'विलियम पेन' के सीईओ निखिल रंजन ने आईएएनएस से कहा, "देश में महंगी कलमों का बाजार बढ़ रहा है और एक अच्छी ब्रांड की या एक डिजाइनर कलम अधिक पसंद की जाती है। इक्यावन वर्ष या इससे अधिक आयु वर्ग के उपभोक्ता इन कलमों के सबसे बड़े खरीददार हैं।"
'विलियम पेन - द वर्ल्ड पेन स्टोर' देश के ऐसे स्टोर हैं जहां कई ब्रांड्स की कलमें मिलती हैं।
रंजन कहते कि अच्छी कलमों के प्रति ब्रांड जागरूकता 88 प्रतिशत है।
'टैक्नोपाक एडवाइजर्स' के 2007 के एक अध्ययन के मुताबिक देश में उम्दा कलमों का बाजार बढ़ता जा रहा है।
महंगी कलमें 15,000 से 40,000 रुपये कीमत में खरीदी जा सकती हैं। कुछ कलमों की कीमत एक करोड़ रुपये तक होती है। प्रीमियम कलमों पर कुल बाजार का 479.3 करोड़ रुपये खर्च होता है।
हाल के वर्षो में कई विदेशी महंगी कलमें भी बाजार में आ गई हैं। इन कलमों में सालाना नौ प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है।
मॉट ब्लैंक (जर्मनी), एस. टी. डूपॉन्ट (फ्रांस), क्रॉस (अमेरिका), सेलर (जापान), कैरै डी'ऐक (स्वीटजरलैंड), कॉनवे स्टीवर्ट (ब्रिटेन) और शैफर (अमेरिका) ब्रांड की कलमें अब देश में उपलब्ध हैं।
एस. टी डूपॉन्ट के निर्यात निदेशक डोमिनिक लीजुअर कहते हैं, "चीन के बाद भारत दुनिया में सबसे अधिक तेजी से बढ़ रही दूसरी अर्थव्यवस्था है। साथ ही यहां महंगी कलमों का आशाजनक बाजार है। इसके लिए प्रयोज्य आय वाले उपभोक्ताओं की ब्रांडेड कलमों के लिए मजबूत आकांक्षा को धन्यवाद देना चाहिए।"
सेलर के बिक्री प्रबंधक क्रिस रीड ने आईएएनएस से कहा, "हमने भारत में अच्छी गुणवत्ता वाली कलमों के बाजार को पहचानते हुए अप्रैल 2006 में यहां व्यापार शुरू किया था।"
शैफर की क्षेत्रीय प्रबंधक जैस्मीन जोन्स कहती हैं कि कलमों के बाजार में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
रंजन कहते हैं कि कलम के इस्तेमाल से नहीं बचा जा सकता। लोगों को चेक, अनुबंध या विलय पर हस्ताक्षर करने के लिए कलम का इस्तेमाल करना ही पड़ता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications