विपक्षी दलों ने बसपा को मिटाने की साजिश रची: मायावती (लीड-1)
बसपा की स्थापना की 25 साल पूरा होने के मौके पर सोमवार को मायावाती ने लखनऊ में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "कांग्रेस व अन्य दलों ने बसपा के गठन के समय से बार-बार इसे मिटाने के प्रयास किए लेकिन वे अपने नापाक इरादों में सफल नहीं रहे। बसपा ने सबको पीछे छोड़ते हुए उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा दल बनने का गौरव प्राप्त किया और वर्ष 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर एक इतिहास कायम किया।"
मायावती ने कहा, " बसपा आज देश के सात राष्ट्रीय दलों में एक है और सभी विरोधी दल बसपा से समझौता करने के लिए आतुर रहते हैं। बसपा के प्रारंभिक 21 साल का इतिहास कांग्रेस की तुलना में ज्यादा शानदार रहा।" उन्होंने स्मारकों और पार्कों में बने हाथियों को बसपा के चुनाव चिन्ह से जोड़कर उसे प्रतिबंधित करने की कांग्रेस और समाजवादी पार्टी(सपा) की मांग को आड़े हाथों लिया।
मायावती ने कहा, "लखनऊ सहित अन्य स्थानों पर बने पार्को और स्मारकों में लगे हाथियों की सूंड ऊपर की तरफ स्वागत मुद्रा में है और इस तरह की स्वागत मुद्रा वाली हाथियों की मूर्तियां देशभर में विभिन्न स्थानों पर लगी हैं। बसपा के चुनाव चिन्ह को प्रतिबंधित करने की मांग न्यायसंगत नहीं है क्योंकि चुनाव चिन्ह वाले हाथी की सूंड नीचे की तरफ है।"
मायावती ने जोर दिया कि इस तरह तो सपा के चुनाव चिन्ह साइकिल और कांग्रेस के हाथ के पंजे को भी प्रतिबंधित किया जाना चाहिए क्योंकि 'सावित्री बाई फुले बालिका शिक्षा मदद योजना' के तहत प्रदेशभर में बालिकाओं को साइकिलें बांटी गईं जो सपा का चुनाव चिन्ह है। इसके अलावा आम तौर पर चुनाव के दौरान रैलियों और जनसभाओं में नेता हाथ हिलाकर अभिवादन करते हैं, इससे तो कांग्रेस का प्रचार होता है। ऐसे में कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर भी प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
बसपा प्रमुख ने कहा, "विपक्षी दल आरोप लगाते रहे हैं कि मेरी सरकार दलित महापुरुषों की मूर्तियां और स्मारक बनाने में सरकारी धन का दुरुपयोग रही है लेकिन मैं उन्हें बता दूं कि मूर्तियों और स्मारकों पर राज्य के बजट का केवल एक फीसदी धन खर्च हुआ है।"
मायावती ने कहा कि आजादी के बाद सबसे ज्यादा समय तक केंद्र और राज्य में शासन करने वाली कांग्रेस ने केवल महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू व गांधी परिवार के दूसरे लोगों की मूर्तियां ही बनवाई दलित महापुरुषों को उपेक्षित किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने गरीबों की लड़ाई लड़ने वाले इन उपेक्षित दलित महापुरुषों के नाम पर स्मारक बनवाकर उन्हें सम्मानित करने का काम किया है।
मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण विधेयक के विरोध में 14 अप्रैल को राज्य में धरना-प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक में दलितों के साथ-साथ पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान किए जाने की पक्षधर है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से राज्यसभा में बसपा ने इस विधेयक पर हुए मतदान का बहिष्कार किया था।
इंडो-एशयिन न्यूज सर्विस।












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