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वैट वापसी के मसले पर राजस्थान विधानसभा में विपक्ष का हंगामा

By Staff
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शून्यकाल के बाद इस मुद्दे पर दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने सदन में सफाई दी कि जिन वस्तुओं पर वैट की दर बढ़ाने की बात कही गई, वो असल में एक चूक मात्र थी। इसका मकसद किसी को नुकसान या मुनाफा पहुंचना नहीं था।

धारीवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने नब्बे पेज का बजट भाषण पढ़ा था। इतने लंबे भाषण में कई बार किसी तथ्य को स्पष्ट करने में भूल हो जाती है। धारीवाल ने गलती सुधार लेने की बात भी कही। हालांकि विपक्ष इस बाबत मुख्यमंत्री से सफाई की मांग कर रहा था, लेकिन इस दौरान गहलोत सदन में नहीं थे।

धारीवाल की सफाई के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा के उपनेता घनश्याम तिवारी से कहा कि विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव और मुख्यमंत्री के बयान को देखकर वह अपनी व्यवस्था देंगे।

इससे पहले गुरुवार को शून्यकाल में इस मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंक झोंक हुई। भाजपा उप नेता घनश्याम तिवारी और माकपा के अमराराम ने इस मुद्दे पर विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष का कहना था कि जो काम किया गया है उसे देखते हुए मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। सदन में काफी देर तक सत्ता और प्रतिपक्ष के बीच नारेबाजी हुई जिसके चलते सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित की गई।

इससे पहले सदन में प्रश्नकाल समाप्त होते ही तिवारी ने विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को सदन के बाहर 14 वस्तुओं पर वैट की दर पांच से घटाकर चार प्रतिशत करने की घोषणा करके विधानसभा सदन की अवमानना की है। अत: मुख्यमंत्री को सदन में माफी मांगने के साथ ही इस्तीफा भी देना चाहिए।

तिवारी ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की कि वह इस संबंध में व्यवस्था दें। इससे पहले माकपा के अमराराम ने विशेषाधिकार हनन को लेकर नोटिस दिया था। इस पर आसन की तरफ से व्यवस्था नहीं देने के खिलाफ प्रतिपक्ष के सदस्यों ने नारेबाजी शुरु कर दी। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी प्रतिपक्ष के खिलाफ नारेबाजी की। हंगामे के बीच अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत ने 12 बजकर 36 मिनट पर सदन की कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित कर दी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर प्रतिपक्ष के सदस्यों ने विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव पर निर्णय देने की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।

तीसरी बार कार्रवाई शुरू होने पर सरकार की तरफ से स्पष्टीकरण देते हुए गृहमंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बजट में की गई घोषणा में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है बल्कि उन्होंने भ्रान्ति का स्पष्टीकरण दिया है। इस स्पष्टीकरण से प्रदेशवासियों या व्यापारियों पर विपरीत असर नहीं पड़ा है। मुख्यमंत्री की तरफ से नौ मार्च को बजट भाषण में वैट दर को चार से पांच प्रतिशत करने और बुधवार को सदन के बाहर 14 वस्तुओं पर वैट चार प्रतिशत रखने की घोषणा से कोई नफा नुकसान नहींे हुआ।

इसके बाद अध्यक्ष ने कहा कि इस विषय पर वह अपनी व्यवस्था सुरक्षित रखते हैं। इसके बाद सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से शुरू हो पाई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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