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राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित (राउंडअप)

By Ajay Mohan Verma
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लगभग तीन घंटे से भी अधिक समय तक चली बहस के बाद यह विधेयक दो तिहाई बहुमत से राज्यसभा में पारित हुआ। विधेयक के पक्ष में 186 मत पड़े जबकि विरोध में मात्र एक मत पड़ा। मतदान में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने हिस्सा नहीं लिया। जनता दल (युनाइटेड) ने विधेयक का समर्थन किया। वह इससे पहले तक विधेयक का विरोध कर रही थी।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस अवसर पर कहा कि महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में चली अब तक की यात्रा का आज एक यादगार दिन है।

विधेयक पर चल रही चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा, "महिलाओं के सामाजिक व आर्थिक उत्थान की दिशा में कई प्रयास किए गए इसके बावजूद महिलाएं इस विकास से वंचित रहीं। घर पर ही उनके साथ भेदभाव किया जाता है। घरेलू हिंसा होती है। शिक्षा व स्वास्थ्य के मामले में भी महिलाएं पिछड़ी हुई हैं। यह खत्म होना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि महिलाओं के सामाजिक व आर्थिक विकास की पहचान को सुदृढ़ करने के लिए यह विधेयक आवश्यक है। "इस विधेयक का समर्थन करने वाले सभी राजनीतिक दलों और इसके नेताओं तथा सदन के सभी सदस्यों का मैं धन्यवाद करता हूं। आपके सहयोग के बगैर यह संभव नहीं था।"

उन्होंने कहा महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में आज का यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। इसकी शुरुआत उस वक्त हुई थी, जब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मतदान की आयुसीमा घटाकर 18 वर्ष की थी।

प्रधानमंत्री ने कहा, "यह महिलाओं को सम्मान है। देश की महान महिला नेत्रियों कस्तूरबा, गांधी, सरोजनी नायडू, एनी बेसेंट, विजय लक्ष्मी पंडित और इंदिरा गांधी आदि के बलिदानों को यह छोटी सी श्रद्धांजलि है।" प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर गीता मुखर्जी को भी याद किया।

इस आरक्षण विधेयक में अल्पसंख्यक और पिछड़ी जाति की महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान किए जाने की कुछ राजनीतिक दलों की मांग का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं मानता हूं कि समाज के इन वर्गो तक उनके हिस्से का विकास नहीं पहुंच पाया है। हमारी सरकार उन तक विकास पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए अन्य उपायों का अपना रही है। इसकी प्रक्रिया भी आरंभ हो चुकी है। यह विधेयक अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विरोधी नहीं है। यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में अगला कदम है। यह ऐतिहासिक और लीक से हटकर है।"

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर राज्यसभा के सभापति डा. हामिद अंसारी से कुछ सदस्यों द्वारा अमर्यादित आचरण किए जाने के लिए माफी भी मांगी।

केंद्रीय विधि मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि सोमवार और मंगलवार को आए अनेक व्यवधानों के बावजूद सभापति हामिद अंसारी की दृढ़ इच्छाशक्ति के लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहिए।

उन्होंने कहा, "हमने अपने इतिहास, सभ्यता और दर्शन से पूरी दुनिया को संदेश दिया है। हमने पूरी दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ाया है और इस विधेयक को पारित कराकर हम पूरी दुनिया में महिलाओं के बारे में अपनी राय को और पुख्ता करेंगे। "

मोइली ने कहा, "इस विधेयक को लेकर संसद में कल और आज जो कुछ हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें किसी भी सुधार प्रक्रिया का समर्थन करना चाहिए।"

इससे पहले, बहस की शुरुआत करते हुए राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने देश के विधायी निकायों में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए इस विधेयक को बहुत जरूरी बताया।

उन्होंने कहा, "जो लोग कहते हैं कि महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए आरक्षण की आवश्यकता नहीं है, वे गलत हैं। स्वतंत्रता के 63 वर्षो बाद भी आज लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सिर्फ 10.7 फीसदी है। ऐसे में आरक्षण से ही महिलओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सकता है।"

जेटली ने कहा कि बीते कई वर्षो के बाद आज वह मौका आया है जब यह ऐतिहासिक विधेयक पारित किया जाएगा। यह अवसर सभी के लिए ऐतिहासिक और अद्भुत है।

कांग्रेस ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक के पेश होने, इस पर चर्चा होने और इसके पारित होने की घटना ऐतिहासिक है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने ऐसा करके जनता से किया अपना वादा निभाया है।

कांग्रेस की जयंती नटराजन ने बहस में हिस्सा लेते हुए कहा, "महिलाओं को आरक्षण देने के संबंध में जनता से किए वादे का पूरा करने का साहस यदि किसी भी राजनीतिक दल में है तो वह कांग्रेस पार्टी में ही है।"

उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री कभी भी पीछे नहीं हटे।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता वृंदा करात ने चर्चा के दौरान कहा कि यह विधेयक महिला संगठनों और आंदोलनों की जीत का नतीजा है।

करात ने कहा कि महिलाएं पंचायती राज व्यवस्था में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने कहा कि पंचायतों ने गरीब महिलाओं को मौका दिया है और वे ग्रामीण इलाकों का विकास कर रही हैं। करात ने इस विधेयक पर राजनीति खत्म करने की बात कही।

जद (यु) नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि यदि पिछड़ी जातियों को चिह्न्ति कर आरक्षण में शामिल किया जाता तो अच्छा होता।

विधेयक का समर्थन करते हुए तिवारी ने कहा कि पिछड़ी जातियों को चिन्हित कर आरक्षण में शामिल किए जाने पर देश का भला होता। उन्होंने कहा कि बिहार में पंचायती राज व्यवस्था में इस प्रकार के आरक्षण को लागू करने से समाज का लोकतंत्रीकरण हुआ है।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि उनकी पार्टी सवर्ण और दलित वर्गो की आर्थिक रूप से पिछड़ी व कमजोर महिलाओं को आरक्षण देने की मांग करती है।

मिश्रा ने कहा कि बसपा चाहती है कि महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन कर उसमें दलित के साथ सवर्ण वर्ग की कमजोर तबके की महिलाओं के आरक्षण का प्रावधान किया जाए। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को मौजूदा स्वरूप में उनकी पार्टी खारिज करती है और इसका विरोध करती है। मिश्रा ने कहा कि संशोधन के साथ यदि इस विधेयक को पेश किया जाए तो हम इसका समर्थन करेंगे। बाद में बसपा ने विधेयक पर हुए मतदान का बहिष्कार किया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते हुए इसका विरोध कर रहे राजनीतिक दलों को भी आड़े हाथों लिया।

राकांपा के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चल रही बहस में भाग लेते हुए कहा, "देश की महिलाओं को बहुत पहले ही यह राजनीतिक अधिकार मिल जाना चाहिए था। यह धारणा अब पुरानी हो चुकी है कि राजनीति औरतों के वश की बात नहीं है।"

इस विधेयक के विरोध में राज्यसभा में सोमवार को अमर्यादित आचरण करने के लिए मंगलवार को सात सदस्यों को निलंबित कर दिया गया। निलंबन के बाद भी ये सभी सदस्य तीन घंटे तक सदन में धरने पर बैठे रह गए।

सभापति को इन सदस्यों को सदन से बाहर करने के लिए मार्शलों का सहारा लेना पड़ा। मार्शलों ने एक-एक कर सभी सातों सदस्यों को सदन से बाहर किया। ये सदस्य थे- सपा के कमाल अख्तर, वीरपाल सिंह यादव, आमीर आलम खान और नंदकिशोर यादव, जद (यु) के एजाज अली, लोजपा के सबीर अली और राजद के सुभाष यादव।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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