महिला आरक्षण विधेयक को मिली राज्यसभा की मंजूरी
लगभग तीन घंटे से भी अधिक समय तक चली बहस के बाद यह विधेयक दो तिहाई बहुमत से राज्यसभा में पारित हुआ। मतदान में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सदस्यों ने हिस्सा नहीं लिया।
इससे पहले, बहस की शुरुआत करते हुए राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने देश के विधायी निकायों में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए इस विधेयक को बहुत जरूरी बताया।
उन्होंने कहा, "जो लोग कहते हैं कि महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए आरक्षण की आवश्यकता नहीं है, वे गलत हैं। स्वतंत्रता के 63 वर्षो बाद भी आज लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सिर्फ 10.7 फीसदी है। ऐसे में आरक्षण से ही महिलओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सकता है।"
जेटली ने कहा कि बीते कई वर्षो के बाद आज वह मौका आया है जब यह ऐतिहासिक विधेयक पारित किया जाएगा। यह अवसर सभी के लिए ऐतिहासिक और अद्भुत है।
कांग्रेस ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक के पेश होने, इस पर चर्चा होने और इसके पारित होने की घटना ऐतिहासिक है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने ऐसा करके जनता से किया अपना वादा निभाया है।
कांग्रेस की जयंती नटराजन ने बहस में हिस्सा लेते हुए कहा, "महिलाओं को आरक्षण देने के संबंध में जनता से किए वादे का पूरा करने का साहस यदि किसी भी राजनीतिक दल में है तो वह कांग्रेस पार्टी में ही है।"
उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री कभी भी पीछे नहीं हटे।
नटराजन ने कहा कि कांग्रेस की सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण ही देश की 50 लाख महिलाएं आज स्थानीय निकायों में विभिन्न पदों पर आसीन हैं।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता वृंदा करात ने चर्चा के दौरान कहा कि यह विधेयक महिला संगठनों और आंदोलनों की जीत का नतीजा है।
करात ने कहा कि महिलाएं पंचायती राज व्यवस्था में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने कहा कि पंचायतों ने गरीब महिलाओं को मौका दिया है और वे ग्रामीण इलाकों का विकास कर रही हैं। करात ने इस विधेयक पर राजनीति खत्म करने की बात कही।
जनता दल (युनाइटेड) के नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि यदि पिछड़ी जातियों को चिह्न्ति कर आरक्षण में शामिल किया जाता तो अच्छा होता।
विधेयक का समर्थन करते हुए तिवारी ने कहा कि पिछड़ी जातियों को चिन्हित कर आरक्षण में शामिल किए जाने पर देश का भला होता। उन्होंने कहा कि बिहार में पंचायती राज व्यवस्था में इस प्रकार के आरक्षण को लागू करने से समाज का लोकतंत्रीकरण हुआ है।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि उनकी पार्टी सवर्ण और दलित वर्गो की आर्थिक रूप से पिछड़ी व कमजोर महिलाओं को आरक्षण देने की मांग करती है।
मिश्रा ने कहा कि बसपा चाहती है कि महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन कर उसमें दलित के साथ सवर्ण वर्ग की कमजोर तबके की महिलाओं के आरक्षण का प्रावधान किया जाए। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को मौजूदा स्वरूप में उनकी पार्टी खारिज करती है और इसका विरोध करती है। मिश्रा ने कहा कि संशोधन के साथ यदि इस विधेयक को पेश किया जाए तो हम इसका समर्थन करेंगे। बाद में बसपा ने विधेयक पर हुए मतदान का बहिष्कार किया।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते हुए इसका विरोध कर रहे राजनीतिक दलों को भी आड़े हाथों लिया।
राकांपा के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चल रही बहस में भाग लेते हुए कहा, "देश की महिलाओं को बहुत पहले ही यह राजनीतिक अधिकार मिल जाना चाहिए था। यह धारणा अब पुरानी हो चुकी है कि राजनीति औरतों के वश की बात नहीं है।"
इससे पहले, इस विधेयक के विरोध में राज्यसभा में सोमवार को अमर्यादित आचरण करने के लिए मंगलवार को निलंबित किए गए विरोधी दल के सात सदस्यों को सदन से बाहर ले जाने के लिए मार्शलों का सहारा लेना पड़ा। निलंबन के बाद ये सदस्य तीन घंटे तक सदन में धरने पर बैठे रह गए थे।
तीन बार के स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही तीन बजे जब शुरू हुई तो समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), जनता दल (युनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के सभी सातों सदस्य सदन में नारेबाजी ही कर रहे थे।
सभापति को इन सदस्यों को सदन से बाहर करने के लिए मार्शलों का सहारा लेना पड़ा। मार्शलों ने एक-एक कर सभी सातों सदस्यों को सदन से बाहर किया। ये सदस्य थे- सपा के कमाल अख्तर, वीरपाल सिंह यादव, आमीर आलम खान और नंदकिशोर यादव, जद (यु) के एजाज अली, लोजपा के सबीर अली और राजद के सुभाष यादव।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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