उल्फा नेता प्रदीप गोगोई को सार्थक वार्ता की उम्मीद
सैयद जरीर हुसैन
सिवसागर, 7 मार्च (आईएएनएस)। लगभग 12 वर्षो बाद रिहा हुए प्रतिबंधित संगठन युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के संस्थापक सदस्य व उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई को केंद्र सरकार से सार्थक वार्ता की उम्मीद है।
गोगोई ने आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "लंबे समय तक कैद में रहने के बाद अपनी रिहाई से मैं खुश हूं। अब मैं उम्मीद करता हूं कि असम में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष खत्म करने के लिए सार्थक वार्ता हो सकेगी।"
उन्होंने कहा, "असम की जनता यदि चाहती है कि हम वार्ता के लिए दिल्ली जाएं, तो हम जरूर जाएंगे। यदि वे चाहेंगे कि हम फिर से हथियार उठाएं तो हम वह भी करने को तैयार हैं।"
वर्ष 1979 से उल्फा से जुड़ने के वाले गोगोई को गत गुरुवार को गुवाहाटी के केंद्रीय कारागार से रिहा कर दिया गया था। वह अप्रैल 1998 से जेल में बंद थे।
वह कहते हैं कि वार्ता तभी संभव हो सकेगी जब जेलों में बंद अन्य उल्फा नेताओं को रिहा किया जाए। हम वार्ता को लेकर सकारात्मक हैं असम के लोगों की भावनाओं के साथ हैं, लेकिन जब तक हमारे शीर्ष नेताओं को रिहा नहीं किया जाएगा तब तक वार्ता का कोई मतलब नहीं है।
उल्लेखनीय है कि उल्फा के छह शीर्ष नेता जो इस वक्त गुवाहाटी की जेल में बंद हैं, वे हैं- इसके अध्यक्ष अरविंद राजखोवा, राजू बरुआ, सशा चौधरी, चित्रबन हजारिका, प्रणाती डेका और भीमकांत बुरागोहेन।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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