मध्यस्थता केंद्र ने की तलाकशुदा जोड़े को मिलाने में मदद
कनु शारदा
नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनएस)। अपनी नौ साल पुरानी शादी तोड़ने का निर्णय लेने के बाद सुखवीर और शोभा सिंह अपने बच्चे के अधिकार को लेकर वर्ष 2009 में दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंचे। लेकिन अदालत की मध्यस्थता के कारण एक वर्ष बाद इस जोड़े ने खुशी-खुशी फिर से शादी कर ली है।
सुखवीर और शोभा ने वर्ष 2000 में शादी की थी, लेकिन शोभा के परिवार ने दोनों के जीवन में हस्तक्षेप शुरू कर दिया। परिणामस्वरूप दोनों के बीच गलतफहमी पैदा होने लगी और रिश्ते में खटास आ गई।
इस जोड़े को दो बच्चे थे। लेकिन पति-पत्नी के बीच गलतफहमी लगातार बढ़ती गई और दोनों ने रिश्ता तोड़ने का फैसला किया। दोनों ने 2009 में तलाक ले लिया और दो में से एक बच्चे के अधिकार को लेकर सुखवीर अदालत पहुंच गए।
लेकिन अदालत ने इस मामले को सुलझाने के लिए दोनों को मध्यस्थता केंद्र भेजने का फैसला किया।
इस मामले की मध्यस्थ अधिवक्ता रेखा अग्रवाल का कहना है, "जब यह मामला मेरे पास आया तो मैंने महसूस किया कि दोनों दंपति अभी भी अपने रिश्ते को बरकरार रखना चाहते हैं। मात्र कुछ गलतफहमी के कारण उन्हें तलाक जैसा अंतिम निर्णय लेना पड़ा है।"
इस दंपति के साथ 20 मुलाकातों के बाद अग्रवाल ने महसूस किया कि लड़की के परिवार ने ही दोनों के बीच दूरियां बढ़ाई है, क्योंकि वे लड़के को पसंद नहीं करते और उन्होंने शोभा को उससे तलाक लेने के लिए मजबूर किया।
अग्रवाल ने आईएएनएस को बताया, "शोभा को समझाना मेरे लिए बहुत कठिन था क्योंकि मैं उसे यह समझाना चाहती थी कि उसके माता-पिता उसके लिए अच्छा नहीं कर रहे हैं। अंतत: मैं दोनों को यह समझाने में सफल हो गई और दोनों ने दोबारा शादी कर ली और वे अपने दोनों बच्चों के साथ खुशी-खुशी रह रहे हैं।" अग्रवाल ने कहा कि दोनों को मिलाना उनके पेशेवर जीवन का सबसे खुशनुमा क्षण रहा है।
अग्रवाल की तरह दिल्ली उच्च न्यायालय के मध्यस्थता केंद्र में सैकड़ों अधिवक्ता विभिन्न मामलों में मध्यस्थ के रूप में काम कर रहे हैं। इन मामलों में तलाक से लेकर भूमि विवाद तक के मामले शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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