भारत के साथ प्रगाढ़ आर्थिक संबंध चाहता है जाम्बिया : राजदूत
देवीरूपा मित्रा
नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील जब 22 फरवरी को संसद में अपना संबोधन दे रहीं थी तो हिन्दी के इस भाषण को सुनने वाले लाखों लोगों में भारत में जाम्बिया के राजदूत एस. के. वालूबिता भी थे।
वालूबिता कहते हैं, "राष्ट्रपति के संबोधन के आखिर में मैंने पहली बार अफ्रीका शब्द सुना। इतना ही नहीं उन्होंने जाम्बिया का भी जिक्र किया।"
राष्ट्रपति ने जनवरी में उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी की जाम्बिया, मलावी और बोत्सवाना यात्रा का जिक्र करते हुए अफ्रीकी महाद्वीप के साथ भारत के रिश्तों को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
वालूबिता ने आईएएनएस के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "वर्ष 2004 में यहां से जाम्बिया जाने वालों की संख्या प्रति माह केवल 10 हुआ करती थी लेकिन अब 200 से 300 भारतीय हर महीने जाम्बिया जाते हैं जिनमें कुछ पयर्टक भी होते हैं। "
दोनों देशों के बीच मित्रता औपनिवेशिक संघर्ष के दौर से है लेकिन 90 के दशक में दोनों देशों के बीच संबंधों में पहले जैसी गर्माहट नहीं रह गई थी हालांकि इसके बाद रिश्तों में मजबूती लाने के प्रयास शुरू हुए जिसका नतीजा यह रहा कि जाम्बिया के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2007-08 में 20.7 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया।
जाम्बिया को भारत दवाएं और मशीनरी निर्यात करता है जबकि वहां से खनिज और कच्चे कपास का आयात किया जाता है।
राजदूत ने कहा, "हम भारत के साथ मजबूत आर्थिक रिश्ते चाहते हैं। भारतीय निजी क्षेत्र के लिए जाम्बिया में काफी संभावनाएं हैं। भारत पहले ही हमारे यहां सबसे बड़ा निवेशक है। कोन्कोला तांबा खदान (केसीएम) में वेदांता रिसोर्सेज ने 1.5 अरब डॉलर का निवेश किया है।"
जाम्बिया सिर्फ निवेश के लिए ही नहीं, बल्कि वह मानव संसाधन विकास समेत कुछ अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है।
भारत सरकार पहले ही जाम्बिया के 2300 लोगों को इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कॉपरेशन (आईटीईसी) के तहत प्रशिक्षण दे चुकी है।
शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए भारत सरकार ने उप-राष्ट्रपति हामिद करजई की जाम्बिया यात्रा के दौरान पांच लाख डॉलर की सहायता राशि दी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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