नेटवर्क बढ़िया होगा तो मतभेद भी कम होंगे : सचिन पायलट
पायलट ने रविवार को आईएएनएस से एक खास बातचीत में कहा, "देश में आज जितने दूरसंचाव व अन्य नेटवर्क हैं, उन्हें हम बहुत अधिक बढ़ाना चाहते हैं। लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का यह बहुत ही अच्छा तरीका है।"
वह मानते हैं दूरसंचार व प्रौद्योगिकी की पहुंच गरीबों तक भी होनी चाहिए। "कुछ राजनीतिक दल समाज में व्याप्त दोषों का भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीयता के नाम पर फायदा उठाते हैं। देश के सभी लोग जब इंटरनेट व अन्य संचार सेवाओं से जुड़ जाएंगे तो ये समस्याएं भी खत्म हो जाएंगी।"
पायलट चाहते हैं इंटरनेट की पहुंच देश के 30 से 40 फीसदी आबादी तक पहुंचे। फिलहाल इसकी पहुंच महज सात फीसदी लोगों तक ही है।
वह कहते हैं, "गांव यदि इंटरनेट से जुड़ जाएंगे तो ग्रामीण व दूरदराज के छात्र भी अच्छे शिक्षा संसाधनों का लाभ ले सकते हैं।"
पायलट इस बात से इंकार करते हैं कि जनता के दबाव में उन्होंने राजनीति में अपना कदम रखा। वह कहते हैं, "मैंने 2001 में अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी। अमेरिका से लौटने के बाद मैंने बहुत सोचा कि आखिरकार मुझे क्या करना चाहिए। मैंने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम भी किया। फिर मुझे मुझे लगा कि अब तक मैंने जो सीखा और अनुभव किया है, उसका सार्वजनिक जीवन में उपयोग किया जाए। राजनीति में आने का मेरा फैसला निजी थी।"
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की तर्ज पर वह भी राजनीति में युवाओं के आने की वकालत करते हैं। वह कहते हैं, "जिन युवओं की इच्छा है और जो सिद्धांतों के प्रति समर्पित हैं, उन्हें राजनीति में आना चाहिए। इसलिए मैं भी देश भर के विश्वविद्यालय के छात्रों से मिलता रहता हूं और उनसे राजनीति में आने की अपील करता हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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