गुर्जर आरक्षण आंदोलन की चेतावनी पर पुलिस सतर्क
बैंसला पिछले दो सप्ताह से गुर्जर बाहुल्य गांवों का दौरा कर बिरादरी के पंच पटेलों के साथ आंदोलन की रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। गुरुवार को ही बैंसला ने भरतपुर के बयाना कस्बे में गुर्जर समाज की प्रतिनिधि सभा में आंदोलन पर विचार किया।
बैंसला का कहना है कि इस बार पीलूपुरा से भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा जिसमें गुर्जरों के अतिरिक्त उन दूसरी कौमों को भी साथ लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बार कोरे आश्वासनों से काम नहीं चलेगा बल्कि कांग्रेस सरकार को आरक्षण का लाभ देना ही पड़ेगा।
बैंसला ने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार के समय विधानसभा ने आरक्षण का जो विधेयक पारित किया था उसे लागू करने में पहले ही बहुत राजनीति हो चुकी। उनका कहना है कि राज्य की कांग्रेस सरकार चाहती तो विधेयक को तत्कालीन राज्यपाल से पहले ही मंजूरी दिलाकर उसे अदालत के दखल से बाहर रखने की कोशिश कर ली जाती। पर ऐसा सोच-समझकर नहीं किया गया जिसके कारण गुर्जर आरक्षण पर राजस्थान हाईकोर्ट ने रोक लगा दी।
कर्नल बैंसला ने कहा कि पुराने तरीके से सरकारी भर्तियां की गई तो इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था की बिना समीक्षा किए फिर से दस साल के लिए बढ़ा दिया गया और इस पर सब लोग चुप्पी साधे रहे, इसके लिए हम सब जिम्मेदार हैं। कर्नल ने सभा में मौजूद लोगों से पुराने तरीके से की जा रही भर्तियों के खिलाफ लामबंद होने की अपील की।
उधर राज्य पुलिस के एक आला अधिकारी ने कहा कि गुर्जर आरक्षण आंदोलन को लेकर गांवों में समाज के पंच पटेलों ने रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। इस अधिकारी ने बताया कि आंदोलन के अगुवा कर्नल बैंसला और दूसरे नेताओं पर पूरी तरह नजर रखी जा रही है। पुलिस का मानना है कि संभवत: गेहूं की फसल कटाई के बाद गुर्जर आरक्षण आंदोलन की शुरुआत हो सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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