भारत-पाक वार्ता को प्रोत्साहन लेकिन मध्यस्थता नहीं : अमेरिका
वाशिंगटन, 3 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका ने कहा है कि उसने भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता को हमेशा प्रोत्साहन दिया है लेकिन वह दोनों देशों के बीच मध्यस्थता नहीं करेगा।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक ने मंगलवार को यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों के अफगानिस्तान में वैध सुरक्षा हित हैं।
उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अमेरिकी नीति और अमेरिकी नीति की दुविधा को समझने के लिए यह समझना होगा कि इस क्षेत्र में भारत और पाकिस्तान दोनों के सुरक्षा हित हैं।
हॉलब्रुक ने कहा कि अफगानिस्तान से सीधी सीमा नहीं होने के बावजूद भारत के वहां वैध सुरक्षा हित हैं। दोनों पड़ोसियों के बीच वार्ता के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि दोनों पड़ोसियों में से कोई एक कहे कि दूसरे का वहां कोई हित नहीं है, तो वार्ता मुश्किल होगी।
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी कहा है कि वह दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की वार्ता को प्रोत्साहन देंगे।"
दोनों देशों के बीच वार्ता के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के बारे में हॉलब्रुक ने कहा कि जल बंटवारा इनमें से एक है।
भारत और पाकिस्तान दोनों देशों से अमेरिका के अच्छे संबंधों के बारे में हॉलब्रुक ने कहा कि दोनों देशों से संबंध सुधारना अमेरिका के हित में है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध सुधार कर क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित की जा सकती है।
इसके बाद विदेश विभाग के प्रवक्ता फिलीप जे. क्राउले ने भी कहा कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान को वार्ता के लिए प्रोत्साहित किया।
हाल ही में भारत-पाकिस्तान की विदेश सचिव स्तरीय वार्ता के संदर्भ में क्राउले ने कहा, "हम दोनों देशों से वार्ता जारी रखेंगे और उन्हें ऐसी वार्ता के लिए प्रोत्साहित करते रहेंगे।"
यह पूछे जाने पर कि वार्ता के लिए प्रोत्साहित करने के अलावा अमेरिका कोई अन्य भूमिका भी निभाएगा क्राउले ने कहा, "यह दो महत्वपूर्ण सहयोगियों के भविष्य का विषय है। इस तरह की वार्ताओं को जारी रखना भारत और पाकिस्तान के दीर्घकालिक हित में है।"
इस समय अमेरिका द्वारा किसी मध्यस्थता के सवाल पर प्रवक्ता ने नकारात्मक जवाब दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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