संगीत की खोज में फोटोग्राफी निर्णायक बिंदु : रघु राय
नई दिल्ली, 27 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय शास्त्रीय संगीत की महान हस्तियां, उनकी कला और परंपरा तस्वीरों में भी उतनी ही जीवंत दिखती है जितनी कि मंच पर और खासकर ऐसा तब होता है जब कैमरे के लैंस के पीछे होते हैं फोटोग्राफर रघु राय। प्रख्यात फोटोग्राफर राय ने खुलासा किया कि पहले वह एक संगीतज्ञ बनना चाहते थे।
राय ने आईएएनएस से एक साक्षात्कार में कहा, "जब मैं बच्चा था तो एक संगीतज्ञ बनना चाहता था। मुझे शास्त्रीय संगीत पसंद था लेकिन मेरे सपने और मेरे पिता द्वारा मेरे लिए देखे गए सपने के बीच एक सांस्कृतिक संघर्ष था। वह सिविल इंजीनियरिंग विभाग में एक प्रशासक थे और मुझे एक इंजीनियर बनाना चाहते थे।"
अलग-अलग स्थितियों और भावों को अपने कैमरे में कैद करने वाले राय ने भारत के 13 महान संगीतकारों की तस्वीरें उतारी हैं। राजधानी स्थित ललित कला अकादमी में 'मेस्ट्रोज: मास्टर्स ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक' शो के तहत इन तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया।
राय ने जाकिर हुसैन, अल्लारखा, रवि शंकर, अली अकबर खान, बिस्मिल्लाह खान, विलायत खान, भीमसेन जोशी, कुमार गंधर्व, किशोरी अमोनकर, मल्लिकार्जुन मंसूर, एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी, डॉ. एस. बालचंदर और हरी प्रसाद चौरसिया जैसे कलाकारों की तस्वीरें ली हैं।
राय कहते हैं, "जब 1960 में मैं एक फोटोग्राफर बना तो फोटोग्राफी मेरी संगीत की खोज का नया मोड़ बन गई। मैं संगीत समारोहों में शामिल हुआ और यहां तक कि हिंदुस्तानी संगीत की महान हस्तियों की तस्वीरें लेने के लिए उनके घर भी पहुंचा। ये कलाकार एक गंभीर विषय थे और इनकी तस्वीरों में गंभीरता जरूरी थी इसलिए ये सभी तस्वीरें श्याम-श्वेत हैं।"
ये तस्वीरें 1970 से 1990 के बीच ली गई हैं।
राय कहते हैं उनके द्वारा ली गई तस्वीरों में मानवीय ऊर्जा दिखाई देती है। वह कहते हैं, "मैं एक पल के लिए संगीतकार से उसी तरह संबद्ध हो जाता हूं जिस तरह से संगीतकार खुद को ईश्वर के साथ जोड़ लेते हैं।"
राय द्वारा ली गई इन तस्वीरों का एक किताब में प्रकाशन किया गया है। कवि और ललित कला अकादमी के अध्यक्ष अशोक वाजपेयी ने इस किताब में संगीतकारों से जुड़ी जानकारियां दी हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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