आम बजट प्रतिक्रिया : उद्योग जगत ने सराहा तो विपक्ष ने नकारा (राउंडअप)

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), वाम दल, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), बीजू जनता दल (बीजद) और समाजवादी पार्टी (सपा) सहित सभी अन्य दलों ने इसे 'जन विरोधी' करार दिया। उधर, कांग्रेस ने इसे सुधार की प्रक्रियाओं को समेकित करने वाला और आधारभूत संरचनाओं को मजबूत बनाने वाला करार दिया है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया :-

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आम बजट की सराहना करते हुए कहा कि यह विकास की गति बनाए रखने और वित्तीय घाटे को समेकित करने की जरूरतों का सही मिश्रण है। उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर मेरी यही राय है कि वित्त मंत्री ने विकास की जरूरतों का सही आकलन करने के साथ-साथ कीमतों के मामलों में कुछ हद तक संयम बरता है।"

सिंह ने कहा, "आपको बजट से उभर रही पूरी तस्वीर देखनी होगी। भारत जैसे विशाल अर्थव्यवस्था वाले देश में वित्त मंत्री के लिए राजस्व लाभ महज 20,000 करोड़ रुपये था।" प्रधानमंत्री ने कहा, "संसाधन जुटाने वाले इस प्रयास से मुद्रास्फीति का दबाव नहीं बढ़ेगा।"

प्रधानमंत्री ने प्रस्तावित प्रत्यक्ष कर संहिता के बारे में उद्योग जगत का डर भी मिटाने की कोशिश की और कहा कि हितधारकों की सभी आश्ांकाओं पर विचार किया जाएगा।

उन्होंने कहा, "प्रत्यक्ष कर संहिता वृद्धि के प्रभाव, गत्यात्मकता के प्रभाव को मजबूत करने का माध्यम होना चाहिए, लेकिन प्रत्यक्ष कर संहिता के लागू होने में विलंब हो जाने से व्यापारिक समुदाय में कुछ आशंकाएं बढ़ गई हैं।"

संसद के बाहर भाजपा सहित अन्य विपक्षी दलों और सपा व राजद जैसे संप्रग के सहयोगियों ने बजट का एक मंच से विरोध किया। पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में वृद्धि के मुद्दे पर इन दलों ने नेताओं ने सरकार को घेरने की कोशिश की। इन सभी दलों ने इस मुद्दे पर ने बजट भाषण के दौरान लोकसभा से बíहगमन भी किया।

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने संवाददाताओं से कहा, "यह किसान विरोधी, गरीब विरोधी और जन विरोधी बजट है।" मीडिया के सामने स्वराज के साथ सपा नेता मुलायम सिंह यादव और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद भी उपस्थित थे।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आम बजट की आलोचना करते हुए इसे आम आदमी के खिलाफ बताया। पार्टी ने कहा है इससे महंगाई और बढ़ेगी। पेट्रोल व डीजल की कीमतें बढ़ाकर सरकार ने तो आम आदमी की कमर ही तोड़ दी है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण के अंत में कहा कि यह बजट आम आदमी, किसानों, कृषक समुदाय, उद्यमियों व निवेशकों का है। वित्त मंत्री की बात पूरी तरह सच्चाई से परे है।"

उन्होंने कहा, "बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि महंगाई से आम आदमी को कैसे राहत दी जाए। लेकिन वित्त मंत्री इस दिशा में कुछ भी करने में असफल रहे हैं। उनके बजट से अमीरों व आर्थिक रूप से शक्तिशाली लोगों को ही राहत दी है, गरीब व आम जनता के लिए तो यह कमर तोड़ने वाला है।"

भाकपा के नेता डी.राजा ने कहा कि सरकार ने महंगाई को लेकर कोई ठोस जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि समूचे विपक्ष के साथ अन्य दलों के संसद से बहिर्गमन का फैसला सुनियोजित नहीं था बल्कि स्वत: स्फूर्त था। सरकार को यह समझना चाहिए।

बीजद के युवा नेता बी. जे. पांडा ने कहा कि इस बजट से महंगाई और बढ़ेगी। समूचे विपक्ष ने एकजुटता दिखाकर सरकार को अच्छा दबाव बनाया है।

कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा बजट मंदी के बाद सुधार की प्रक्रियाओं को समेकित करेगा, आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करेगा और राजस्व में सुधार लाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बजट को जन विरोधी करार देते हुए कहा है कि देश का गरीब तबका पहले से ही महंगाई की मार झेल रहा है और इस बजट के बाद तो वह महंगाई की चक्की में पीस ही जाएगा।

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2010-11 के आम बजट को गरीब और जन विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट केंद्र की कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की गुजरात विरोधी मानसिकता को भी दर्शाता है।

मोदी ने एक बयान जारी कर कहा, "यह बजट गरीब विरोधी, किसान विरोधी, युवा विरोधी, महिला विरोधी और दलित विरोधी है। इससे समाज के वंचित वर्ग को बहुत नुकसान पहुंचेगा।"

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वित्तीय वर्ष 2010-11 के लिए शुक्रवार को लोकसभा में पेश किये गये आम बजट को निराषाजनक और महंगाई बढ़ाने वाला बताया।

राजद के महासचिव एवं पूर्व सांसद रामकृपाल यादव ने आम बजट को पूरी तरह महंगाई बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि बजट में पेट्रोल और डीजल की मूल्य वृद्घि करने से सभी वस्तुओं के दाम बढें़गे, जिससे जरूरी वस्तुएं भी आम लोगों की पहुंच से दूर हो जाएंगी।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया :-

देश के प्रमुख औद्योगिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने बजट को एक संतुलित प्रयास बताया है।

बनर्जी ने एक बयान में कहा है, "बजट प्रस्तावों में वित्त मंत्री का बारीक संतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां उन्होंने अगले तीन वर्षो में वित्तीय घाटे को कम करने के लक्ष्यों को निर्धारित करते हुए वित्तीय मजबूती का खाका स्पष्ट रूप से तैयार किया है, वहीं दूसरी ओर विनिवेश के लक्ष्यों को निर्धारित करते हुए और उत्पाद शुल्क प्रोत्साहनों को आंशिक रूप से वापस लेते हुए पूंजी निवेश के लिए संसाधनों को जुटाने का काम किया है।"

बनर्जी ने कहा है, "वित्त मंत्री ने वृद्धि का सकारात्मक वातावरण तैयार करने के लिए आम आदमी को अधिक प्रयोज्य आय मुहैया कराते हुए कृषि में उत्पादकता के मुद्दों से निपटने के लिए आधार तैयार किया है।"

बिहार उद्योग संघ के पूर्व अध्यक्ष क़े पी़ झुनझुनवाला ने इसे मिश्रित बजट कहा। उन्होंने पूवरेतर राज्यों को हरित क्रांति के लिए बजट में विशेष प्रावधान करने, सड़कों पर विशेष जोर देने को सही कदम बताया है तो डीजल के मूल्य में वृद्घि की कड़ी आलोचना की है। स्टील और सीमेंट जैसी आवश्यक वस्तुओं को भी महंगा करने को वह सही नहीं मानते।

गैर बैंकिंग वित्तीय संगठनों (एनबीएफसी) ने आम बजट का स्वागत किया है। निजी कंपनियों को बैंकिंग लाइसेंस देने की घोषणा को एनबीएफसी ने सकारात्मक कदम बताया है।

श्रेई इंफ्रास्ट्रक्च र फाइनेंस के प्रबंध निदेशक हेमंत कनोरिया ने कहा कि उनकी कंपनी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) द्वारा दिशा निर्देश जारी किए जाने की बेसब्री से इंतजार कर रहा है।

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि आरबीआई अगले तीन से छह महीने के भीतर उन गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए दिशा निर्देश जारी करे जो बैंकों की स्थापना करना चाहती हैं। इन दिशा निर्देशों का हम इंतजार कर रहे हैं।"

पीयरलेस जनरल फाइनेंस एंड इनवेस्टमेंट कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने सरकार के इस कदम को सकारात्मक बताया। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "एनबीएफसी को बैंकिंग सिस्टम में शामिल करने का फैसला सकारात्मक कदम है।"

आम जनता की प्रतिक्रिया :-

आम बजट पर देश भर में भी मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है। लोगों ने हालांकि पेट्रोल डीजल की कीमतों को बढ़ाने के लिए बजट की आलोचना की। बुंदेलखंड को अलग से धन आवंटित करने के साथ-साथ कृषि और ग्रामीण क्षेत्र पर सरकार के मेहरबान होने से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में लोगों में खुशी है वहीं आय कर सीमा में शुरुआती स्तर पर मामूली राहत मिलने से लोग थोड़े निराश हैं।

लखनऊ विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ए. के. सेनगुप्ता ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि संतुलित बजट पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक, कृषि और शिक्षा क्षेत्र पर बजट में ध्यान दिया गया है।

लखनऊ स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के प्रोफेसर सुकुमार नंदी ने प्रणब मुखर्जी के बजट को मिलाजुला बताया। उन्होंने कहा कि बजट में वर्ष 2010-11 में 3.75 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण बांटने का प्रस्ताव, किसानों को पांच फीसदी पर ऋण, हरित क्रांति के लिए 400 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) के लिए 40,000 करोड़ रुपये, ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग को बढ़ावा देने का प्रस्ताव स्वागत योग्य हैं।

रायबरेली के प्रगतिशील किसान संतराम मौर्या कहते हैं कि बजट में किसानों का ख्याल रखा गया है। राज्य के सबसे पिछड़े क्षेत्र बुंदेलखंड के विकास के लिए 1200 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव सराहनीय है। वित्त मंत्री ने बजट में 'इंडिया' से ज्यादा भारत पर ध्यान दिया है। बजट में ग्रामीण, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र के लिए काफी कुछ किया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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