आम बजट : महंगाई की चिंता दरकिनार, पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे (लीड-4)
लोकसभा में पेश वित्तीय वर्ष 2010-11 के आम बजट में अर्थव्यवस्था में मांग को बनाए रखने के लिए कल्याणकारी और आधारभूत संरचना क्षेत्र के लिए आंवटन में वृद्धि करने के साथ कहा गया है कि अर्थव्यवस्था के बुरे दिन खत्म हो चुके हैं। इसमें उच्च विकास दर और समेकित विकास के पथ पर लौटने का वादा किया गया है।
सरकार ने रक्षा बजट में 8.13 फीसदी की वृद्धि करते हुए इसे 141,703 करोड़ रुपये से बढ़कर 147,344 करोड़ रुपये कर दिया। इसके अलावा अल्पसंख्यों के लिए आवंटन में भी शानदार 50 फीसदी की वृद्धि की गई है। इसे 1740 करोड़ रुपये से बढ़कर 2600 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बजट को विकास की गति बनाए रखने और वित्तीय घाटे को समेकित करने की जरूरतों का सही मिश्रण बताया है। प्रधानमंत्री ने कहा, "कुल मिलाकर मेरी यही राय है कि वित्त मंत्री ने विकास की जरूरतों का सही आकलन करने के साथ-साथ कीमतों के मामलों में कुछ हद तक संयम बरता है।"
सिंह ने कहा, "आपको बजट से उभर रही पूरी तस्वीर को देखनी होगी। भारत जैसे विशाल अर्थव्यवस्था वाले देश में वित्त मंत्री के लिए राजस्व लाभ महज 20,000 करोड़ था।"
यह पूछने पर कि क्या केंद्रीय उत्पाद शुल्कों में प्रस्तावित वृद्धि से मुद्रास्फीति बढ़ेगी, प्रधानमंत्री ने कहा, "संसाधन जुटाने वाले इस प्रयास से मुद्रास्फीति का दबाव नहीं बढ़ेगा। उन्होंने संयम बरता है और यह संकेत दिया है कि अर्थव्यवस्था में आपको सब कुछ एक साथ नहीं मिल सकता।"
बजट में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में प्रति लीटर एक-एक रुपये की वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। राजकोषीय समेकन के लिए कच्चे पेट्रोलियम पर पांच फीसदी, डीजल और पेट्रोल 7.5 फीसदी और अन्य परिष्कृत उत्पादों पर 10 फीसदी के बुनियादी शुल्क का प्रस्ताव किया गया है।
मुखर्जी ने कहा, "आज जब मैं आपके सामने खड़ा हूं, मैं कुछ यकीन से कह सकता हूं कि हम संकट से बेहतर ढंग से निपट सकते हैं।"
उन्होंने कहा, "यह नहीं कहा जा रहा है कि आज की चुनौतियां नौ महीने पहले की चुनौतियों से कम बड़ी हैं, जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में दोबारा कार्यभार संभाला था।"
केंद्रीय वित्त मंत्री ने निजी करदाताओं के लिए कई श्रेणियों का प्रस्ताव किया। इसमें 1.60 लाख रुपये तक की आय को कर मुक्त रखा गया है। पांच लाख रुपये तक की आय पर 10 फीसदी कर और आठ लाख रुपये तक की आय पर 20 प्रतिशत कर लगाने का प्रस्ताव है। इससे अधिकआय पर 30 प्रतिशत कर देना होगा।
आयकर सीमा बढ़ाने से कुल 60 फीसदी करदाताओं को लाभ पहुंचेगा। बजटमें कहा गया है कि दीर्घकालिक इंफ्रास्टक्चर बांड्स में निवेश करने पर 20,000 रुपये तक की छूट मिलेगी। यह राहत आयकर अधिनियम की 80 सी धारा के तहत मिलने वाली 100,000 रुपये की राहत के अतिरिक्त होगी।
सरकार आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए अगले आकलन वर्ष से ज्यादा आसान प्रारूप "सरल 2" भी जारी करेगी। वेतनभोगी करदाता वर्तमान में आयकर रिटर्न-1 फार्म का इस्तेमाल करते हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष सूचीबद्ध की गई तीन चुनौतियां आज भी प्रासंगिक हैं। इनमें जल्द से जल्द नौ फीसदी की उच्च विकास दर पर लौटना और उसे दहाई के आंकड़े तक ले जाना, विकास को ज्यादा समग्र बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास करना तथा खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाना शामिल है।
उन्होंने कहा, "हमें यकीन है कि 10 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य अब ज्यादा दूर नहीं रहा है।" उन्होंने कहा कि सरकार देश की विकास दर ज्यादा व्यापक आधार वाला बनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहनों की भी समीक्षा करेगी।
उन्होंने कहा कि योजना का 46 फीसदी आवंटन ढांचागत विकास के लिए होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष कर संहिता अगले साल अप्रैल से लागू होगी। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति को सरल बनाया जाएगा और सार्वजनिक ऋण में कमी लाने की योजना तैयार की जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्र में आवासों के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि शहरी विकास के लिए भी 7,605.75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। शहरी विकास के लिए 7,605.75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के लिए 40,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। स्कूली शिक्षा के लिए 31,036 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। पिछले बजट में स्कूली शिक्षा के लिए 26,800 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इस साल के बजट में सामाजिक क्षेत्र के लिए कुल 1,37, 674 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आवंटन को भी 19,534 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 22,300 करोड़ रुपये कर दिया है। ग्रामीण विकास के लिए इस बार कुल 66,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इस साल का बजट वर्ष 2009-10 के आर्थिक समीक्षा की पृष्ठभूमि में आया है जिसमें कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है जो अगले वर्षो में 10 फीसदी की विकास दर के आंकड़े को छू सकती है।
मुखर्जी का यह चौथा तथा लगातार दूसरी बार सत्ता में आई संप्रग सरकार का दूसरा बजट है। बजट को सदन में पेश करने से पहले प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में उसे मंजूरी दिलाई गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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