आम बजट प्रतिक्रिया : ग्रामीण भारत खुश, मध्यवर्ग निराश
लखनऊ विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ए. के. सेनगुप्ता ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि संतुलित बजट पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक, कृषि और शिक्षा क्षेत्र पर बजट में ध्यान दिया गया है। सेनगुप्ता ने कहा कि बजट में कृषि क्षेत्र के लिए एक लाख करोड़ से ज्यादा का धन, स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 22,300 करोड़ रुपये, सामाजिक क्षेत्र के लिए एक लाख 37 हजार करोड़ रुपये, स्कूली शिक्षा के लिए 31 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव निश्चति तौर पर सराहनीय कदम है।
लखनऊ स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के प्रोफेसर सुकुमार नंदी ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बजट को मिलाजुला बताया। उन्होंने कहा कि बजट में वर्ष 2010-11 में 3.75 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण बांटने का प्रस्ताव, किसानों को पांच फीसदी पर ऋण, हिरत क्रांति के लिए 400 करोड़, राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) के लिए 40,000 करोड़ रुपये, ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग को बढ़ावा देने का प्रस्ताव स्वागत योग्य हैं।
नंदी ने कहा कि उद्योग जगत के लिए बजट में काफी किया जा सकता था, जो नहीं किया गया। आने वाले समय में पेट्रोलियम पदार्थो और यूरिया में वृद्धि होने से महंगाई और बढ़ेगी।
लखनऊ के गोमती नगर में रहने वाली गृहिणी रुपरानी मिश्रा ने कहा कि बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण के लिए वित्त मंत्री ने कोई बात नहीं की। जिस गति से महंगाई बढ़ रही है, उससे आज गृहणियों के सामने रसोई चलाना सबसे बड़ी चुनौती है।
बैंक कर्मचारी अविनाश चंद्र कहते हैं कि बजट में वित्त मंत्री ने ज्यादा आमदनी वालों को ही राहत दी है। दो लाख रुपये से कम आमदनी वालों के लिए बजट में कुछ नहीं है। आयकर की छूट का दायरा और बढ़ाना चाहिए था।
रायबरेली के प्रगतिशील किसान संतराम मौर्या कहते हैं कि बजट में किसानों का ख्याल रखा गया है। राज्य के सबसे पिछड़े क्षेत्र बुंदेलखंड के विकास के लिए 1200 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव सराहनीय है। वित्त मंत्री ने बजट में 'इंडिया' से ज्यादा भारत पर ध्यान दिया है। बजट में ग्रामीण, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र के लिए काफी कुछ किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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