आर्थिक समीक्षा: सार्वजनिक वितरण प्रणाली के नए मॉडल की रूपरेखा

समीक्षा ने के अनुसार ऐसा विश्वास किया जाता है कि मौजूदा व्यवस्था में पीडीएस स्टोर-कीपर सब्सिडीयुक्त अनाज को खुले बाजार में बेच देते हैं और फिर शेष अनाज में मिलावट करते हैं और इस घटिया उत्पाद को गरीबी रेखा से नीचे और गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों को बेच देते हैं जिन्हें इस मामले में कोई विकल्प प्राप्त नहीं होता है।

इन कमियों को दूर करने के लिए "परिवर्तित प्रणाली की रूपरेखा" सामने रखते हुए समीक्षा में कहा गया है, "इस प्रणाली के दो आधार हैं- (1) सब्सिडी सीधे गरीब परिवारों को दी जाए बजाय इसके कि पीडीएस स्टोर कीपरों को सस्ते अनाज के रूप में दी जाए और फिर वह इसे जरूरतमंद परिवारों को दें और (2) इन परिवारों को किसी भी स्टोर से खाद्यान्न खरीदने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

मान लीजिए किसी बीपीएल परिवार को प्रति माह गेहूं के लिए एक खास राशि की निवल सब्सिडी मिलती है, यह सब्सिडी उस परिवार को बाजार मूल्य से कम कीमत पर गेहूं देने की बाजाय उसे इस राशि के कूपन दिए जाएं जिन्हें गेहूं खरीदते समय पैसे देने के बदले में पीडीएस स्टोरों पर प्रयोग किया जा सकता है।

इस नई प्रणाली के अंतर्गत पीडीएस स्टोरों को सब्सिडीयुक्त दर पर कोई अनाज नहीं दिया जाएगा और वे अनाज बेचते समय बाजार मूल्य लेने के लिए स्वतंत्र होंगे, भले ही ग्राहक कोई भी हो। एक मात्र परिवर्तन यही है कि पीडीएस स्टोरों को अब ये कूपन स्वीकार करने की अनुमति दी जाएगी जो वे स्थानीय बैंक में ले जा सकते हैं और उसके बदले में धनराशि ले सकते हैं और बैंक आगे सरकार के पास जाएंगे और बदले में पैसा ले सकेंगे। इसके अतिरिक्त, जिन परिवारों को ये कूपन मिलेंगे, उन्हें अपनी पसंद के पीडीएस स्टोर में जाने की अनुमति होनी चाहिए।

ऐसी प्रणाली भ्रष्टाचार से अधिक अप्रभावित रहेगी। चूंकि स्टोर के मालिक को गरीब और अमीर सभी खरीदारों से अनाज का एक ही मूल्य मिलेगा, और जैसाकि इस समय हो रहा है, उसे गरीब खरीदारों को लौटाने का और बाजार मूल्य पर ही खरीदने वालों की सेवा करने का कोई प्रलोभन नहीं रहेगा। (यदि यह महसूस होता है कि कूपन को धनराशि से बदलना परेशानी का सबब है तो हम यह प्रावधान कर सकते हैं कि जब स्टोर कीपर कूपनों को धनराशि से बदलें तो उन्हें 2 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान किया जाए)।

दूसरे, चूंकि बीपीएल खरीदार अपने कूपन को लेकर किसी भी स्टोर में जा सकते हैं तो वे उन भंडारों का बहिष्कार कर पाएंगे जो उन्हें घटिया किस्म का अनाज या अनाज में कंकड़ मिलाकर बेचने की कोशिश करते हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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