एथलीटों को दर्द में खेलते रहने से बचाना चाहिए
'अमेरिकन कॉलेज ऑफ फुट एंड एंकल सर्जन्स' (एसीएफएएस) के शल्य चिकित्सकों के मुताबिक आमतौर पर खिलाड़ी अपने पैरों और टखने में लगी चोटों के प्रति गंभीरता नहीं दिखाते हैं।
चिकित्सकों का मानना है कि खिलाड़ियों को अपनी चोट को गंभीरता से लेना चाहिए और चोट की सही पहचान, उपयुक्त इलाज और सुधार कार्यक्रम के बाद चोट के पूरी तरह ठीक हो जाने के पर ही दोबारा मैदान की ओर रुख करना चाहिए।
एसीएफएएस से जुड़े टखने के विख्यात शल्य चिकित्सक रॉबर्ट डुग्गन ने कहा, "खिलाड़ी आमतौर पर अपनी पैरों और टखने में लगी हल्की चोट को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे चलने की हालत में होते हैं।
खिलाड़ियों को समझना चाहिए कि चलने-फिरने की हालत में होने के बावजूद चोट गंभीर हो सकती है। शरीर आपका वजन सहन कर रहा है इसका मतलब यह नहीं कि चोट गंभीर नहीं है।"
डुग्गन मानते हैं कि चोट के बावजूद खेलते रहना खिलाड़ियों के लिए रणनीति के लिहाज से भी ठीक नहीं होता है क्योंकि इसके उनके करियर पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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