आर्थिक समीक्षा : औद्योगिक उत्पादन, विदेशी निवेश में वृद्धि

वर्ष 2008 के उत्तरार्ध में औद्योगिक वृद्धि दर गिरकर अपने न्यूनतम स्तर 0.6 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। आईआईपी में वृद्धि दर में वर्ष 2007 की पहली तिमाही से लेकर 2008-09 की अंतिम तिमाही तक गिरावट लगातार जारी रही।

गैर टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं को आईआईपी में शामिल सभी औद्योगिक समूह मंदी से उबरे हैं लेकिन टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं और मध्यवर्ती वस्तुओं के उत्पादन में निरंतर वृद्धि से औद्योगिक क्षेत्र में सुधार हुआ है। वाहन, रबड़, प्लास्टिक, ऊनी, और रेशमी कपड़े, काष्ठ उत्पाद, एवं विविध निर्माण में अप्रैल-नवंबर 2009 के दौरान काफी अच्छा सुधार देखा गया। मशीनरी और कपड़ा उद्योग क्षेत्रों के विकास दर में भी वृद्धि हुई। कागज, चमड़ा, खाद्य एवं जूट वस्त्र जैसे समूहों में कोई स्पष्ट सुधार नहीं देखा गया

आईआईपी आंकड़ों के अनुसार वस्त्र समूह (सूती, ऊनी, रेशमी, मानव निर्मित और जूट वस्त्र तथा जूट उत्पाद) में अप्रैल-नवंबर 2008 के दौरान हुई एक प्रतिशत वृद्धि की तुलना में अप्रैल-नवंबर 2009 में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कुल मिलाकर वस्त्र उत्पादन में अप्रैल-नवंबर 2009-10 (अनंतिम) के दौरान 10.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सर्वाधिक वृद्धि हौजरी क्षेत्र (12.8 प्रतिशत) में देखी गई। इसके बाद बिजली-करघा क्षेत्र (12.5 प्रतिशत) का स्थान रहा।

मंदी के बावजूद भारत में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह वर्ष 2008-09 में उत्साहवर्धक रहा। मौजूदा वर्ष में भी यह जारी है। अप्रैल-नवंबर 2009-10 के दौरान कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेशी प्रवाह 93,354 करोड़ रुपये रहा जबकि 2008-09 में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 85,700 करोड़ रुपये था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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