बेंगलुरू के कार्लटन टॉवर्स में रखा था 1,000 लीटर डीजल (लीड-1)

ज्वलनशील पदार्थो को ऐसी इमारतों में जमा करना गैर-कानूनी है। पुलिस ने इसके मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज करके इमारत को सील कर दिया है।

पुलिस महानिरीक्षक पी. एस. संधू ने कहा कि यदि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया होता तो कई जानें बचाई जा सकतीं थी।

मंगलवार को लगी भीषण आग में नौ लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 50 लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने टॉवर्स के मालिकों के खिलाफ लापरवाही बरतने और गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है।

अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि आग कहां से लगनी शुरू हुई थी। पुलिस और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि आग दूसरी मंजिल पर लगी जिससे धुआं अन्य मंजिलों पर फैल गया, जिससे लोगों का दम घुटने लगा।

अधिकारियों का कहना है कि आग अगर छत पर रखे डीजल में लग जाती तो जानमाल का नुकसान इससे भी ज्यादा भयानक होता। यह डीजल बिजली चले जाने की स्थिति में जेनरेटर चलाने के लिए रखा गया था।

अग्निशमन विभाग के निदेशक डी. बी. चेंगप्पा ने आईएएनएस से कहा कि इमारत को सील करके हादसे की जांच की जा रही है। सरकार ने बेंगलुरू ब्रुहत महानगरपालिका (बीबीएमपी) को निर्देश दिया है कि वह शहर की सभी ऊंची इमारतों में आग से सुरक्षा संबंधी उपायों की समीक्षा करे।

घायलों में सात की हालत गंभीर बनी हुई है। इन सभी को मणिपाल अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती करवाया गया है, जबकि 15 अन्य सामान्य वार्ड में भर्ती हैं।

मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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