उल्फा के 2 बड़े नेता जमानत पर रिहा (लीड-2)
आतंकवाद एवं विध्वंसात्मक गतिविधि (निरोधक) अधिनियम (टाडा) की विशेष अदालत में सरकारी पक्ष ने उल्फा के उपाध्यक्ष गोगोई और प्रसार सचिव डैमरी की जमानत का विरोध नहीं किया।
एक वकील बिजॉन महाजन ने आईएएनएस से कहा, " सरकारी वकील ने दोनों नेताओं की जमानत याचिका का विरोध नहीं किया। इस तरह अदालत ने उन्हें जमानत दे दी।"
गोगोई को 1998 में कोलकाता से गिरफ्तार करके गुवाहाटी जेल में रखा गया था। कुछ औपचारिकताओं के बाद उन्हें बुधवार को रिहा कर दिया जाएगा।
वहीं, डैमरी को 2003 में 'ऑपरेशन ऑल क्लियर' के दौरान भूटान में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें भारत को सौंप दिया गया था। डैमरी को मंगलवार शाम तक रिहा कर दिए जाने की उम्मीद है।
असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा, "हमें शांति वार्ता के शुरू होने और उल्फा नेताओं के सहयोग की आशा है। हम उनके साथ गरिमा और सम्मान के साथ बात करेंगे।"
शांति वार्ता की संभावनाएं तलाशने के लिए उल्फा द्वारा गठित पीपुल्स कंसलटेटिव ग्रुप (पीसीजी) के सदस्य लचित बोर्दोलोई ने कहा, "सरकार का यह कदम वास्तव में बहुत सकारात्मक है।"
डैमरी के एक चचेरे भाई ने कहा, "हम सब अपने भाई की रिहाई का इंतजार कर रहे हैं। गांव में उनके भव्य स्वागत की तैयारी है।"
सरकार के साथ उल्फा की शांति वार्ता में इन दोनों नेताओं के अहम भूमिका निभाने की आशा व्यक्त की जा रही है।
वार्ता की समर्थक नामी असमी लेखिका इंदिरा गोस्वामी ने कहा, "हमें आशा है कि दोनों नेता बातचीत की दिशा में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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