संसदीय मत संग्रह से बचना चाहती थी सरकार : भाजपा (लीड-1)
भाजपा संसदीय दल की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "भाजपा तथा इसके साथ संसद के दोनों सदनों में समूचा विपक्ष व्यापक बहस की मांग करने के लिए खड़ा हो गया, जिसमें मूल्य वृद्धि के मुद्दे पर मतदान करने का प्रावधान हो। मुद्रास्फिीति संप्रग सरकार द्वारा देश के नागरिकों पर थोपा गया अनधिनियमित कर है।"
बयान में कहा गया, "सरकार अपने आंकड़ों के बारे में आश्वस्त नहीं है। राज्यसभा में सरकार अल्पमत में है जबकि लोकसभा में उसके सहयोगी दलों के समक्ष हां या ना की पसंद थी। सहयोगी दल यदि हां करते तो वह भी मूल्यवृद्धि के आरोप के भागीदार बनते और ना करते तो उन्हें आगामी विधानसभा चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ता। इसलिए सरकार इस मुद्दे पर दोनों सदनों में संसदीय मत संग्रह से बचना चाहती थी। यही एक ऐसा कारण था जिसके तहत दोनों सदन स्थगित कर दिए गए।"
इससे पहले, पार्टी ने चेतावनी दी कि महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्तावों को जब तक स्वीकार नहीं किया जाता है, तब तक संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं चलने दी जाएगी।
राज्यसभा में भाजपा के उपनेता एस. एस. अहलूवालिया ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्तावों को जब तक स्वीकार नहीं किया जाएगा, सदन की कार्यवाही चलने नहीं दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि महंगाई के विषय पर विपक्ष के हंगामे के कारण मंगलवार को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
अहलूवालिया ने कहा, "समूचा विपक्ष चाहता है कि महंगाई के मुद्दे पर सिर्फ चर्चा ही न हो बल्कि मत विभाजन भी हो।" उन्होंने कहा कि सरकार दोनों सदनों में बहस से बचना चाह रही है।
भाजपा सहित कुछ अन्य विपक्षी दलों ने लोकसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव का और राज्यसभा में प्रश्नकाल स्थगित किए जाने और इस विषय पर चर्चा के लिए नियम 167 और नियम 168 के तहत नोटिस दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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