तिब्बत में समस्या से इंकार करता रहा है चीन : दलाई लामा

पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात करने वाले तिब्बति धर्मगुरु ने सोमवार को समाचार चैनल सीएनएन पर कहा, "चीन का दावा है कि तिब्बत के लोग बहुत खुश हैं और पहले से काफी अधिक बेहतर हैं।"

बहरहाल उन्होंने कहा कि तिब्बत की निर्वासित सरकार को तिब्बति जनता के सांस्कृतिक और धार्मिक दमन की खबरें मिलती हैं।

तिब्बत के स्वतंत्रता या स्वायत्तता के दावे को चीन नहीं मानता है और पूरे क्षेत्र पर संप्रभुता का दावा करता है। परंतु भारत में वर्ष 1959 से ही निर्वासित जीवन बिता रहे दलाई लामा ने कहा कि तिब्बत स्वतंत्रता नहीं चाहता।

दलाई लामा ने कहा, "इसलिए हम मध्यम मार्ग की बात करते हैं। हमें तिब्बत में लागू नीतियों से शिकायत है। इससे वास्तव में बहुत नुकसान है। परंतु दूसरी ओर हम चीन से अलगाव नहीं चाहते। तिब्बत एक भूबद्ध देश है और पिछड़ा हुआ है। हर तिब्बति तिब्बत का आधुनिकीकरण चाहते हैं। इसलिए हम पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना से अलगाव नहीं चाहते।"

यह याद दिलाए जाने पर कि हाल ही में उन्होंने मध्यम मार्ग की विफलता को स्वीकार किया, दलाई लामा ने कहा, "10 मार्च 2008 के संकट के बाद मैंने सार्वजनिक रूप से कहा कि तिब्बत के भीतर सुधार लाने के मेरे प्रयासों का पहलू विफल हो गया है। परंतु इसका अर्थ संपूर्ण विफलता नहीं है। दूसरी ओर हमारे प्रयासों को काफी चीनी बुद्धिजीवियों या लेखकों का समर्थन मिला है।"

दलाई लामा ने कहा कि अब अमेरिका और अन्य देश उनके प्रयासों का समर्थन करने लगे हैं और भारत सरकार तो काफी पहले से उनका समर्थन कर रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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