सापों के बगैर भी बज रही है सपेरों की बीन
सपेरा बस्ती (दिल्ली सीमा), 22 फरवरी (आईएएनएस)। सरकार ने सांपों को पकड़ने और उन्हें कैद करके रखने पर जब से प्रतिबंध लगाया है, दिल्ली की सीमा के पास स्थित बदरपुर के सपेरा बस्ती के तमाम सपेरों के सामने पेट पालने का दूसरा साधान खोजने की मजबूरी पैदा हो गई।
अब इन सपेरों ने अपना और परिवार वालों का पेट पालने के लिए एक नया रास्ता खोज निकाला है। ये सपेरे अपनी पारंपरिक वेशभूषा में शादियों में बीन बजाकर धर्नाजन कर रहे हैं। इन दिनों दिल्ली में कई ऐसे बैंड सक्रिय हैं, जिनमें 12-14 सपेरे शामिल होते हैं।
फर्क बस इतना है कि कभी ये अपनी पोटली में बंद सापों के सामने बीन बजाकर पैसे कमाया करते थे और अब इनकी बीन सापों के बगैर ही बज रही है।
सरकारी प्रतिबंध के कारण अपना पेशा बदलने वाले सपेरा नानू नाथ कहते हैं, "सरकार ने जैसे ही अपना फैसला सुनाया कि हम सापों को कैद करके नहीं रख सकते, हमारे सामने पेट पालने की मुसीबत खड़ी हो गई।
यह काम हम पीढ़ी दर पीढ़ी से करते आ रहे हैं। हम पढ़े लिखे भी नहीं हैं कि कहीं काम करके पेट पाल सकें। ऐसे में हमने शादियों में बीन बजाकर अपना पेट पालने का रास्ता खोज निकाला।"
राजस्थान से आए ये सपेरे पांच दशक से दिल्ली की सीमा पर रह रहे हैं। ये यहां बेहतर सुविधाओं की तलाश में आए थे। पीढ़ियों से ये गलियों, कूचों और कस्बों में घूम-घूमकर अपने सापों को दिखाते और बीन बजाते हुए पैसे कमाया करते थे।
सरकार द्वारा प्रतिबंध के बाद इनके पास सिर्फ बीन ही ऐसा साधन रह गई थी, जिसके माध्यम से ये कुछ कमा सकते थे। इस पेशा से जुड़े सपेरे राजेश चौहान कहते हैं, "प्रतिबंध के बाद हमने अपने सापों को सरकार के हवाले कर दिया। इसके बाद हम शादियों, जन्मदिन समारोहों और छोटे उत्सवों में बीन बजाकर अपना पेट पालने लगे।"
राजेश बताते हैं कि बीन वाला शादी का बैंड बनाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि दिल्ली में पहले से ही कई शादी के बैंड मौजूद थे। बकौल राजेश, "प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए हमने फैसला किया कि हम अपने बैंड में उन लोगों को भी शामिल करेंगे, जो बीन के अलावा दूसरे वाद्ययंत्र भी बजाते हैं। इस तरह हमने 12-14 सदस्यों वाला एक बैंड बनाया, जिसकी विशेषता बीन पर आधारित संगीत है।"
शादियों में बजाने के बदले बीन बैंड को 3500 से 5000 रुपये तक मिल जाते हैं। यह उनकी उस कमाई से बहुत बेहतर राशि है, जो वे लोगों को सांप दिखाकर कमाया करते थे। एक अन्य सपेरे संजीव नाथ ने बताया, "विवाह के मुहूत्र के दौरान हम अच्छी कमाई कर लेते हैं। बाकी समय हम शादियों के लिए बुकिंग करने और अन्य काम में व्यस्त रहते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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