पुलिस को 35 घंटे मशक्कत कराने वाला युवक गंभीर मनोविकार से ग्रस्त

छत्रपति शाहूजी महाराज मेडिकल युनीवर्सिटी (सीएसएमएमयू) के मनोचिकित्सा विभाग प्रमुख और राजू के चिकित्सक हरजीत सिंह ने शनिवार को पत्रकारों से कहा, "वह गंभीर मनोविकार से पीड़ित है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज में आत्महत्या करने के विचार आते हैं।"

मनोविकार होना मस्तिष्क की एक असामान्य स्थिति है। इस स्थिति में मरीज वास्तविकता से दूर रहता है।

उन्होंने कहा, "इस बीमारी का कोई आवश्यक कारण नहीं होता। इसे मस्तिष्क की अस्वस्थता से जोड़ा जा सकता है। यह एक ऐसी अवस्था है जो बिना कारण विकसित हो सकती है। हालांकि हम इस बीमारी का कोई विशेष कारण पता लगाने के लिए इस समय मरीज के चिकित्सा इतिहास का अध्ययन कर रहे हैं।"

सीएसएमएमयू के चिकित्सकों के मुताबिक राजू 2002 से अवसाद का मरीज है। उन्होंने कहा कि उसे करीब 15 दिन की चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना होगा जिसके बाद वह सामान्य जिंदगी बिता सकेगा।

राजू के माता-पिता उसकी मानसिक हालत खराब होने की बात स्वीकारते हैं लेकिन इसका कोई कारण नहीं बताते। हालांकि उसके दोस्तों का कहना है कि कुछ साल पहले राजू को अपनी मर्जी का करियर न चुनने देने के बाद वह अवसाद में चला गया था।

राजू के मित्र पवन सिंह ने पत्रकारों से कहा कि वह एम. एससी. (गणित) है और प्रशासनिक सेवा में जाना चाहता था लेकिन उसका परिवार उसे शिक्षा क्षेत्र में भेजना चाहता था।

राजू ने बुधवार रात खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। बेटे द्वारा दरवाजा खोलने से मना कर देने पर उसके पिता शबीर अहमद ने गुरुवार सुबह पुलिस को बुलाया। पुलिसकर्मियों ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की तो उसने अपने पिता की बंदूक से गोलियां चलाईं। इस घटना में एक निरीक्षक सहित दो पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

लगभग 35 घंटे तक चली मशक्कत के बाद पुलिस को शुक्रवार शाम उसे बाहर निकालने में कामयाबी मिली थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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