विकास दर 7.2 फीसदी रहने की उम्मीद (लीड-1)
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को समीक्षा रिपोर्ट सौंपने के बाद परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने हालांकि राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण की जरूरत बताते हुए आगामी दो वर्षो में विकास दर क्रमश: 8.2 व 9 फीसदी रहने का अनुमान लगाया। परिषद ने आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों के मसले पर स्पष्ट नीति की जरूरत बताते हुए अगले वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र में सकारात्मक वृद्धि की उम्मीद जाहिर की।
रंगराजन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, "परिषद अगले वर्ष कृषि में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि की उम्मीद कर रही है और वर्ष 2011-12 में इसमें चार फीसदी की विकास दर हासिल किए जाने की उम्मीद है।"
परिषद ने औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों में भी वृद्धि की संभावना व्यक्त की है। रंगराजन ने कहा, "इस आधार पर हमारा प्रारंभिक आकलन यह है कि वर्ष 2010-11 में अर्थव्यवस्था 8.2 फीसदी और 2011-12 में 9 फीसदी की दर से विकास करेगी।"
परिषद ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में खाद्य पदार्थो की कीमतों में वृद्धि पर चिंता जताई है।
परिषद ने कहा, "पिछले दो सालों में दर्ज किए गए राजकोषीय घाटे और राजस्व संग्रह में कमी को सरकार जारी नहीं रख सकती और आने वाले वित्त वर्ष में उसे स्वयं वित्तीय समेकन की शुरुआत करनी होगी।"
समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि राजकोषीय घाटा कम करना जरूरी है लेकिन दूसरी तरफ सरकार को पूंजीगत खर्च विशेषकर आधारभूत सेक्टर में खर्च सुनिश्चित किए जाने की जरूर है।
परिषद के मुताबिक वित्तीय सुधार को ध्यान में रखते हुए वित्तीय खर्च में कटौती की संभावना नहीं दिख रही है।
हाल ही में बीटी बैंगन पर उठे विवाद की पृष्ठभूमि में कहा गया है, "गुजरात और महाराष्ट्र में बीटी कपास की फसल की कामयाबी और इससे किसानों को हुए लाभ के बाद यह जरूरी है कि सरकार को आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों को लेकर एक स्पष्ट नीति रखनी चाहिए।"
परिषद द्वारा देश की अर्थव्यवस्था के बारे में सौंपी गई समीक्षा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं :
- चालू वित्त वर्ष में विकास दर 7.2 फीसदी
-अगले दो वर्षो में विकास दर 8.2 फीसदी और नौ फीसदी
- चालू वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र में 0.2 फीसदी की नकारात्मक विकास दर
-औद्योगिक उत्पादन की दर 8.6 फीसदी
- सेवा क्षेत्र में 8.7 फीसदी की दर से विकास
- खाद्यान्न महंगाई वर्ष 2010-11 में भी आम कीमतों को भी प्रभावित कर सकती है
-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा
-चालू वित्त वर्ष में अनुमानित निवेश की दर 36.2 फीसदी रहेगी
-अनुमानित बचत की दर 34.0 फीसदी रहेगी
- निर्यात में सुधार की गति धीमी रहने के साथ इसके 168.7 अरब डॉलर रहने का अनुमान
-वर्ष 2010-11 में राजकोषीय घाटे में एक से डेढ़ फीसदी की काटौती संभव
-सेवा कर कवरेज को विस्तार मिलना चाहिए
- कीमतों पर काबू पाने के लिए समय पर आवश्यक वस्तुओं को जारी किया जाना चाहिए
- उत्पादन में कमी की आशंका पर समय पर आयात की मंजूरी मिलनी चाहिए
- गेहूं का उत्पादन पिछले साल के समान और दाल के उत्पादन में मामूली वृद्धि का अनुमान
-गर्मी के मौसम में चावल के उत्पादन में कमी जबकि सर्दी में चावल उत्पादन बेहतर रहने का अनुमान
- लेकिन सरकार के पास गेहूं और चावल का स्टॉक संतोषजनक होना चाहिए
-मध्यावधि में कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में विकास में सबसे ज्यादा बाधाएं
-आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों के बारे स्पष्ट नीति की जरूरत
-परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के लिए आयात बढ़ाया जाए
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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