नक्सली हमले के बाद कई जवान लापता
पुलिस ने अब तक कम से कम 21 जवानों के मारे जाने की और 10 अन्य के घायल होने की ख़बर दी है. घायलों में कई की हालत गंभीर बताई गई है. अधिकारियों का कहना है कि 10 से 12 जवान अभी भी लापता हैं. सीपीआई (माओवादी) के प्रवक्ता किशनजी ने इस हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा है, "पी चिदंबरम के ग्रीन हंट के जवाब में यह हमारा पीस हंट है."
उधर बीबीसी के झारखंड संवाददाता सलमान रावी ने ख़बर दी है कि सोमवार को देर रात माओवादियों ने झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के पास सीआरपीएए के एक कैंप पर भी हमला किया है और वहां मंगलवार की सुबह तक मुठभेड़ जारी है.
हमला
पश्चिम बंगाल में नक्सलियों का हमला लालगढ़ से सटे सिल्दा में इस्टर्न फ़्रंटियर राइफ़ल्स के जवानों ने कैंप पर हुआ है. बीबीसी के पश्चिम बंगाल संवाददाता सुबीर भौमिक के अनुसार ये कैंप नया है और अभी वहाँ सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम नहीं किए गए थे. यानी वहाँ गश्त वगैरह का पूरा इंतज़ाम नहीं था.
पश्चिमी मिदनापुर ज़िले के ज़िलाधिकारी एनएस निगम ने बीबीसी को बताया कि 25 मोटरसाइकिलों पर सवार क़रीब 50 माओवादियों ने कैंप को घेर कर हमला किया. उनके पास अत्याधुनिक हथियार थे. पहले उन्होंने अंधाधुंध फ़ायरिंग की, हथगोले फेंके और फिर कैंप को आग लगा दी.
उनका कहना है कि शुरू में जवानों ने इस हमले का प्रतिरोध किया लेकिन माओवादियों ने कैंप को तहस-नहस कर दिया. पुलिस का कहना है कि जिस समय नक्सलियों का एक गुट हमला कर रहा था दूसरा गुट कैंप से हथियार जमा करने में लगा हुआ था. इन हथियारों को नक्सली अपने साथ ले गए.
अधिकारियों का कहना है कि जिस समय हमला हुआ ज़्यादातर जवान या तो आराम कर रहे थे या फिर शाम का खाना बनाने की तैयारी कर रहे थे. हमलों के बाद जाते-जाते नक्सली सड़क पर बारूदी सुरंग बिछाकर चले गए. कैंप से कई जवानों के गोलियों के छलनी, जले और अधजले शव मिले हैं.
पश्चिम बंगाल के ख़ुफ़िया विभाग के अधिकारी अपराजित मुखर्जी ने बीबीसी को बताया कि दोपहर एक बजे उन्होंने एलर्ट जारी किया था कि सिल्दा के 20-25 मिनट की दूरी पर कुछ नक्सली एकत्रित हो रहे हैं. उनका कहना है कि आरंभिक सूचना के आधार पर एक चेतावनी दे दी गई थी.
इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के प्रवक्ता किशनजी ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है. उन्होंने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा, "हमारा हमला सफल रहा है. हम वहाँ से हथियार भी ले गए हैं. ये गृह मंत्री पी चिदंबरम के ऑपरेशन ग्रीन हंट का जवाब है." उन्होंने नक्सलियों के हमले को पीस हंट का नाम दिया है.
किशनजी ने कहा कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं और ऐसे हमले भी रोक सकते हैं लेकिन इससे पहले सरकार को अपना अभियान ग्रीन हंट रोकना होगा. 'ग्रीन हंट' राज्य सरकारों और केंद्रीय सुरक्षा बलों का नक्सलियों के ख़िलाफ़ संयुक्त अभियान है. इस महीने के शुरू में केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने माओवादी हिंसा से प्रभावित चार राज्यों पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उड़ीसा के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात की थी. चिदंबरम ने चेतावनी दी थी कि अगर माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर बातचीत के लिए आगे नहीं आए, तो ऑपरेशन ग्रीन हंट में तेज़ी लाई जाएगी.













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